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ट्रंप प्रशासन ने फिर तेज किया डिपोर्टेशन, धीमा फैसला देने वाले इमिग्रेशन जजों को हटाने में जुटा अमेरिकी न्याय विभाग

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : May 07, 2026 12:04 pm IST,  Updated : May 07, 2026 12:04 pm IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने देश में फिर से डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इसके लिए अमेरिका का न्याय विभाग ऐसे इमिग्रेशन जजों को उनके पद से हटा रहा है, जो फैसला सुनाने में तथाकथित रूप से देरी करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। Image Source : AP

फीनिक्स: अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने डिपोर्टेशन में तेजी लाने के लिए अब धीमा फैसला देने वाले इमिग्रेशन जजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग अब उन इमिग्रेशन जजों को हटाने की दिशा में काम कर रहा है, जो बहुत धीरे फैसले देते हैं या कानून का पालन नहीं करते। यह बात एक्शन अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कही। ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन अदालतों को नया रूप देना चाहता है और 37 लाख लंबित मामलों के बैकलॉग को कम कर बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन (निर्वासन) की अपनी मुहिम को तेज करना चाहता है।

पॉम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद ब्लैंच ने संभाला मोर्चा

ट्रंप प्रशासन के डिपोर्टेशन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पिछले महीने पाम बॉन्डी को उनके पद से हटाए जाने के बाद अब ब्लैंच ने मोर्चा संभाला है। वह फीनिक्स में बॉर्डर सिक्योरिटी एक्सपो के वार्षिक कार्यक्रम में मौजूद रहे। यह इमिग्रेशन अधिकारियों, स्थानीय और राज्य पुलिस अधिकारियों तथा संघीय सरकार के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों को आकर्षित करता है। बुधवार को इस सम्मेलन में उनकी मौजूदगी इस बात को दर्शाती है कि ट्रंप प्रशासन में इमिग्रेशन प्रवर्तन और सीमा सुरक्षा कितनी बड़ी प्राथमिकता बन गई है। इमिग्रेशन अदालतों में बदलाव को लेकर ब्लैंच ने कहा, “आप शपथ लेते हैं और आपको सहानुभूति या अपनी मनमानी के आधार पर फैसले नहीं करने की अनुमति नहीं है।” “अगर कुछ जज कानून को सही तरीके से लागू नहीं कर रहे, अनुचित रूप से देरी कर रहे हैं या अस्वीकार्य बैकलॉग जमा कर रहे हैं, तो हम उनके स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति को लाने की कोशिश करेंगे।” 

डिपोर्टेशन पर ट्रंप को सबसे बड़ा फोकस

सत्ता में आते ही ट्रंप का सबसे बड़ा फोकस डिपोर्टेशन था। ट्रंप अब तक लाखों विदेशियों को उनके देश वापस भेज चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन को अपनी केंद्रीय प्राथमिकता बनाया है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरे सरकार स्तर पर प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत अमेरिकी शहरों में प्रवासियों पर सख्ती, डिटेंशन सुविधाओं का विस्तार और इमिग्रेशन अधिकारियों की भर्ती बढ़ाई गई है। हालांकि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ट्रंप के डिपोर्टेशन एजेंडे को लागू करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है, लेकिन इमिग्रेशन अदालतें इस सिस्टम का अहम हिस्सा हैं, जो न्याय विभाग के अंतर्गत आती हैं। 

ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों जजों को हटाया

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दर्जनों इमिग्रेशन जजों को उनके पद से हटाया जा चुका है। आलोचकों का कहना है कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि वे बहुत अधिक शरण (असाइलम) के मामले मंजूर कर रहे थे। प्रशासन ने बंद असाइलम सुनवाइयों में मास्क पहने अधिकारियों को प्रवासियों को हथकड़ी लगाने का निर्देश दिया है और जजों को “लाइन में आने” के लिए मेमो जारी किए हैं। कई प्रवासी और उनके समर्थक कहते हैं कि इमिग्रेशन अदालतें अब जाल बनती जा रही हैं -लोग नियमित सुनवाई पर जाते हैं और गिरफ्तार हो जाते हैं। फेडरल अदालतें जहां सख्त प्रक्रिया और आजीवन पदावधि होती है, इसके विपरीत इमिग्रेशन अदालतों का संचालन न्याय विभाग करता है और अटॉर्नी जनरल जजों को कम बाधाओं के साथ हटा सकते हैं। 

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