न्यूयॉर्क/वाशिंगटन: भारत-पाकिस्तान युद्ध रोकवाने का तथाकथित दावा करने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी बयानों को भारतीय विदेश मंत्रालय हर बार खारिज करता रहा है। इससे ट्रंप बौखलाए हुए हैं। लिहाजा अभी कुछ दिनों पहले ही ट्रंप ने इस बार सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने कॉल किया था। मगर भारत ने इस बार भी ट्रंप के दावे को आधारहीन बता दिया। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति अपना आपा खो बैठे हैं। पीएम मोदी के भाव नहीं देने से खिसियाये ट्रंप ने इस बार ईरान पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल भारतीय संस्थाओं पर बैन लगा दिया है।
पीएम मोदी की बेरुखी ट्रंप पर भारी
ट्रंप के सभी आरोपों को भारतीय विदेश मंत्रालय लगातार खारिज कर रहा है। इधर भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने और आगे भी ज्यादा टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकियों के बावजूद पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे ट्रंप खुद की बेइज्जती महसूस कर रहे हैं। पीएम मोदी की इस बेरुखी ने ट्रंप की आक्रामकता पर गहरी चोट की है। भारत को झुकाने की ट्रंप की हर कोशिशें अब तक नाकाम हुई हैं। भारत ने अमेरिका के किसी भी दबाव के आगे झुकने और अपनी संप्रभुता व सम्मान के खिलाफ समझौता करने से साफ इनकार कर दिया है। इससे अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है।
अमेरिका ने की क्या कार्रवाई
अपने अनाप-सनाप बयानों के लिए जाने जाने वाले ट्रंप के प्रशासन ने भारत की उन संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं जो ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस व्यापार से मिलने वाली धनराशि तेहरान के क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को समर्थन देने और हथियार प्रणालियां खरीदने में उपयोग की जाती है, जो ‘‘अमेरिका के लिए सीधा खतरा’’ हैं। अमेरिका के विदेश और वित्त मंत्रालयों ने उन ‘शिपिंग नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाए हैं जो ईरानी शासन की ‘‘दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों’’ को अवैध तेल बिक्री के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही उन एयरलाइंस और उनसे जुड़ी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरान समर्थित आतंकी संगठनों को हथियार और आपूर्ति भेजती हैं।
कई भारतीय नागरिकों और संस्थाओं पर बैन
इस प्रतिबंध सूची में जिन भारतीय नागरिकों और कंपनियों को शामिल किया गया है उनमें जैर हुसैन इकबाल हुसैन सैय्यद, जु़ल्फिकार हुसैन रिजवी सैय्यद, महाराष्ट्र स्थित ‘आरएन शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ और पुणे स्थित ‘टीआर6 पेट्रो इंडिया एलएलपी’ शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत, पनामा और सेशेल्स सहित कई देशों में स्थित कुल 17 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाज़ों को नामित कर रहा है जो ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल हैं।
41 संस्थाओं में विमान भी होंगे नामित
इसके साथ ही वित्त विभाग 41 संस्थाओं, व्यक्तियों, जहाज़ों और विमानों को नामित कर रहा है ताकि ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर कार्रवाई को तेज किया जा सके और उन वित्तीय नेटवर्कों को बाधित किया जा सके जो ईरान की अवैध गतिविधियों को सहायता प्रदान करते हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस तेल व्यापार से उत्पन्न धनराशि का उपयोग ईरान समर्थित क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को सहायता देने और हथियार प्रणालियां खरीदने में किया जाता है, जो अमेरिकी बलों और सहयोगी देशों के लिए सीधा खतरा हैं। (भाषा)