बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान अमरपुर विधानसभा क्षेत्र में आरजेडी और जेडीयू के बीच कांटे का मुकाबला हो सकता है। दो दशक से यह सीट इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच कड़े मुकाबले का केंद्र रही है। इस बार प्रशांत किशोर के आने से लड़ाई रोचक हो गई है। असली मुकाबला अभी भी एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच ही है। एक तरफ कांग्रेस और आरजेडी हैं तो दूसरी तरफ जेडीयू और बीजेपी हैं। ऐसे में इस सीट पर रोचक लड़ाई देखने को मिल सकती है। इस बार यहां 11 नवंबर को मतदान होना है।
अमरपुर विधानसभा सीट की स्थापना 1957 में हुई थी और यह बांका लोकसभा सीट के छह खंडों में से एक है। शुरुआत में यहां भी कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन 1985 के बाद से पार्टी यहां जीत के लिए तरस रही है और अब गठबंधन में यहां से टिकट मिलने की भी कोई संभावना नहीं है।
कब किसे मिली जीत?
अमरपुर में कुल 16 विधानसभा चुनाव हुए हैं। कांग्रेस ने इनमें से चार में जीत दर्ज की है। आरजेडी और जेडीयू को तीन-तीन बार जीत मिल चुकी है। संयुक्त समाजवादी पार्टी दो बार जीती है। वहीं, भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार को एक-एक बार जीत मिली है। 2020 में कांग्रेस को इस सीट पर करीबी हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, तब मुकाबला त्रिकोणीय था और जेडीयू के जयंत राज ने 53963 वोट हासिल कर मुकाबला जीता था। वहीं, तीसरे स्थान पर रहे लोजपा के मृणाल शेखर को 40308 वोट मिले थे। कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को 50721 वोट मिले थे।
अब किसका पलड़ा भारी?
2020 विधानसभा चुनाव के नतीजे देखें तो इस बार जेडीयू और लोजपा की एकता एनडीए गठबंधन के पक्ष में जाएगी। वहीं, आरजेडी और कांग्रेस की एकजुटता विपक्षी गठबंधन की ताकत बढ़ाएगी। हालांकि, सियासी पंडितों का मानना है कि उम्मीदवार बदलने से यहां के समीकरण भी बदल सकते हैं। प्रशांत किशोर की मौजूदगी सत्ताधारी गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है और आरजेडी को मौका मिलने पर यह सीट इंडिया गठबंधन जीत सकता है।
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