बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नाथनगर सीट पर सभी की निगाहें रहेंगी। जेडीयू का गढ़ मानी जाने वाली यह सीट फिलहाल आरजेडी के खाते में हैं, लेकिन एनडीए की एकता के चलते इस बार जेडीयू की जीत तय मानी जा रही है। हालांकि, एनडीए गठबंधन के लिए अंदरूनी कलह से निपटना बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी, जेडीयू और लोजपा रामविलास के बीच अनबन हो सकती है। पिछले चुनाव में भी चिराग की बगावत के चलते ही जेडीयू को हार झेलनी पड़ी थी और आरजेडी को जीत मिली थी। इस बार यहां 11 नवंबर को मतदान होना है।
अगर एनडीए गठबंधन अपनी भीतरी कलह से निपटने में सफल रहता है तो नीतीश कुमार इस सीट पर भी अपनी जीत तय मान सकते हैं। साल 2000 से इस सीट पर हर बार जेडीयू ही जीतती आई थी। 2019 में हुआ उप-चुनाव भी जेडीयू के खाते में गया था, लेकिन 2020 में सियासी समीकरण ऐसे बने कि आरजेडी को जीत मिली। इस बार भी प्रशांत किशोर हर सीट पर कुछ न कुछ वोट जरूरी काटेंगे। अगर इस सीट पर भी उनका असर ज्यादा दिखा तो फिर आरजेडी या जेडीयू में से किसी एक को फायदा मिल सकता है।
कब किसे मिली जीत?
1967 में बनी नाथनगर सीट में कुल 15 चुनाव हुए हैं और छह बार जेडीयू को जीत मिली है। वहीं, 2020 में पहली बार यह सीट आरजेडी के खाते में गई थी। कांग्रेस ने यह सीट तीन बार जीती है और आखिरी बार कांग्रेस को 1980 में जीत मिली थी। जनता दल भी यहां दो बार जीत चुका है। भारतीय जनसंघ और लोकदल को एक-एक बार जीत मिली है।
इस बार एनडीए का पलड़ा भारी
2020 विधानसभा चुनाव में भले ही आरजेडी को जीत मिली हो, लेकिन इस बार एनडीए का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान गठबंधन का हिस्सा थे। इसका असर यह हुआ कि यहां जेडीयू उम्मीदवार ने बढ़त हासिल की। इस बार भी एनडीए उम्मीदवार को ही जीत मिलने की संभावना है।
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