टिकारी: बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। टिकारी विधानसभा सीट बिहार की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। यह गया जिले में आती है। 2020 के विधानसभा चुनावों में यह सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने जीती थी। HAM के उम्मीदवार अनिल कुमार ने कांग्रेस के सुमन कुमार को 2630 वोटों के अंतर से हराया था। इस सीट पर इस साल विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। इस बार बिहार की सियासत में काफी कुछ नया होने वाला है। एक तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज मैदान में है, वहीं दूसरी तरफ आरजेडी से निष्कासित तेज प्रताप यादव भी चुनाव में उतरने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
क्या हैं साल 2020 और 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे?
बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक टिकारी भी है। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अनिल कुमार जीते थे। अनिल कुमार को कुल 70359 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे सुमन कुमार को कुल 67729 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) के कमलेश शर्मा रहे थे। उन्हें कुल 16385 वोट मिले थे।
साल 2015 के विधानसभा चुनावों में भी जेडीयू के अभय कुमार सिन्हा जीते थे। उन्होंने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अनिल कुमार को 31813 वोटों के मार्जिन से हराया था। तब अभय कुमार सिन्हा को कुल 86975 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अनिल कुमार को कुल 55162 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर रहे शिवसेना उम्मीदवार अरुण कुमार सिंह को 5927 वोट मिले थे।
कैसा होगा साल 2025 का चुनाव?
2010 से अनिल कुमार इस क्षेत्र में एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने पहली बार 2010 में जेडीयू के टिकट पर जीत दर्ज की। 2015 में टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी बदलकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का दामन थामा, लेकिन चुनाव हार गए। 2020 में हम ने एनडीए के साथ मिलकर टिकरी से चुनाव लड़ा, जिसमें जेडीयू और बीजेपी के समर्थन से अनिल कुमार ने 2,630 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की लेकिन यह मुकाबला इसलिए भी कड़ा हो गया था क्योंकि एनडीए से अलग होकर लोजपा ने 16,000 से अधिक वोट ले लिए थे।
2025 में सीट को बनाए रखना एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। देखना ये होगा कि इस बार बिहार की जनता किस पार्टी पर अपने भरोसे की मुहर लगाती है। वैसे इस बार का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि नई सियासी पार्टी जनसुराज भी अपना भाग्य आजमा रही है।