बिहार चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। सभी दलों के नेताओं ने चुनावी जनसभाएं और रैलियां करना शुरू कर दिया है। बिहार की खास सीटों की बात करें तो पालीगंज विधानसभा सीट इनमें से एक है।इस सीट पर वामपंथी दल की पकड़ है। बिहार की राजधानी पटना जिले के ग्रामीण इलाके में बसी पालीगंज विधानसभा सीट हमेशा से ही सियासी गतिविधियों का केंद्र रही है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पालीगंज विधानसभा सीट आती है।
NDA और महागठबंधन के बीच जंग का मैदान
2025 के आगामी विधानसभा चुनाव में यह सीट फिर से NDA (BJP-JDU) और महागठबंधन (RJD-Congress) के बीच कांटों भरी जंग का मैदान बनेगी, जहां प्राशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी सरप्राइज पैकेज बन सकती है।
इस सीट पर ओबीसी समुदाय के लोग अधिक
पालीगंज का जातिगत गणित बिहार की सियासत का आईना है। इस सीट पर यादव (लगभग 20-25%) और कुशवाहा (20-22%) यहां के प्रमुख ओबीसी समुदाय हैं, जो महागठबंधन के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। वहीं, भूमिहार (10-12%) और अन्य ऊपरी जातियां NDA के पक्ष में झुकाव रखती हैं।
यादव और मुस्लिम वोटर गठजोड़
एससी वोटरों की अच्छी खासी संख्या (18%) और मुस्लिम समुदाय (लगभग 10-12%) भी समीकरण को जटिल बनाते हैं, जो अक्सर वामपंथी दलों या महागठबंधन को फायदा पहुंचाते हैं। कुल मिलाकर, यह सीट जातिगत ध्रुवीकरण का शिकार रहती है, जहां यादव-मुस्लिम गठजोड़ और कुशवाहा-भूमिहार गठबंधन निर्णायक साबित होते हैं। 2020 में वामपंथी उम्मीदवार की जीत ने दिखाया कि यहां मजदूर-किसान वोट भी अहम हैं।
2015 में RJD का दबदबा
पालीगंज ने पिछले तीन चुनावों में राजनीतिक अस्थिरता का नजारा पेश किया है। 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी का दबदबा रहा है। 2020 में वामपंथी लहर चली थी।
2020 में वामपंथी उम्मीदवार ने दर्ज की जीत
2020 के विधानसभा चुनाव परिणाम के आकंड़ों पर नजर डालें तो इस सीट से सीपीआईएमएल के उम्मीदवार संदीप यादव ने जीत दर्ज की थी। संदीप यादव को 67,917 वोट मिले थे। जेडीयू के उम्मीदवार जय वर्धन यादव को 37002 वोट मिले थे।
आरजेडी के जय वर्धन यादव ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया
पालीगंज में 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार जय वर्धन यादव ने बीजेपी के उम्मीदवार राम जन्म शर्मा को हराया था। आरजेडी के उम्मीदवार को 64,932 वोट मिले थे। बीजेपी के उम्मीदवार राम जन्म शर्मा को 41,479 वोट मिले थे।