पटना: बिहार में राजधानी पटना के निचले इलाकों समेत कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा और उसकी सहायक नदियों में आए उफान ने सूबे की बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में लोगों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े, इसे लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री ने आज वैशाली और सारण में सामुदायिक रसोई का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों को अपने हाथों से खाना परोसा और बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ खुद भी भोजन किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत व्यवस्था की जानकारी ली और प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनीं।
डीएम-एसपी को सख्त निर्देश
सीएम सम्राट चौधरी ने सभी बाढ़ प्रभावित जिलों के डीएम-एसपी को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर सहूलियत समय पर मुहैया कराया जाय। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए ।आपको बता दें कि राज्य में फिलहाल बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 226 सामुदायिक रसोई संचालित किया जा रहा है, जिसमें अब तक करीब 3.75 लाख लोगों को भोजन कराया गया है। वहीं, चार राहत शिविरों में 2,505 लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
NDRF और SDRF की 37 टीमें तैनात
राहत कार्यों के तहत बाढ़ प्रभावितों के बीच 81,100 पॉलीथिन शीट और 19 हजार ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए हैं। आवागमन के लिए 1,602 नावें संचालित की जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित जिलों में NDRF और SDRF की 37 टीमें तैनात हैं। सरकार का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य तेज किए जा रहे हैं।

नदियों का जलस्तर स्थिर
राज्य में बाढ़ संकट के बीच राहत भरी खबर भी आने लगी है। कई प्रमुख नदियों का जलस्तर स्थिर है और कुछ नदियों का पानी घटने लगा है। मुख्य रूप से गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदी (इंद्रपुरी बराज) का जलस्तर कई स्थानों पर या तो स्थिर है या फिर तेजी से घट रहा है। इस मामले में आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से राहत और बचाव कार्यों में तत्परता लाते हुए प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुबह-शाम का भोजन, ड्राई राशन पैकेज और पॉलीथिन शीट आदि का वितरण किया जा रहा है। साथ ही आवागमन में सहूलियत की दिशा में नावों की संख्या में भी वृद्धि की गई है।
गंडक और कोसी के हालात
आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक का जलस्राव सोमवार को सुबह 10 बजे 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक दर्ज किया गया एवं इसकी प्रवृत्ति स्थिर है। इसी तरह कोसी में वीरपुर बराज के पास नदी का जलस्राव 1 लाख 98 हजार 150 क्यूसेक और सोन नदी (इन्द्रपुरी बराज) का जलस्राव 1 लाख 33 हजार 134 क्यूसेक दर्ज किया गया। इन दोनों नदियों की प्रवृत्ति घटने की है।
विभाग के मुताबिक, डुमरिया घाट एवं हाजीपुर में गंडक, बलतारा एवं कुरसैला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर एवं मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती एवं दरौली एवं गंगपुर में घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण राज्य के 13 जिलों, पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगू सराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया एवं अरवल के 74 प्रखंडों में 423 ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत लगभग 27.01 लाख जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित हुई है।
हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान
बिहार मौसम सेवा केन्द्र ने अगले 2 दिनों में राज्य के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा एवं कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की। आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति की सतत निगरानी में जुटा हुआ है। उधर, राजधानी पटना के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पटना के दीघा स्थित बिंद टोली के घरों में गंगा का पानी घुसने के कारण करीब 1500 परिवार बेघर हो गए हैं। पीड़ित अब जेपी गंगा पथ के किनारे टेंट और त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं।
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