बुधवार को बिहार के कई जिलों में झमाझम बारिश ने मौसम तो सुहाना कर दिया लेकिन वज्रपात के कारण मातम पसर गया। बेगूसराय शहर से लेकर बलिया तक झमाझम बारिश भी हुई। मौसम के इस रूप को देखकर किसानों में सिहरन पैदा हो गई है क्योंकि किसानों की पकी हुई फसल अभी खेतों में पड़ी हुई है। राज्य में वज्रपात की चपेट में आकर 7 लोगों की मौत हो गई। बेगूसराय के भगवानपुर थाना क्षेत्र, मुफस्सिल थाना क्षेत्र और बलिया थाना क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हो गई और दो महिला व दो लड़कियों की हालत गंभीर है। इन्हें इलाज के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
पहली घटना
घटना भगवानपुर थाना क्षेत्र के मानोपुर गांव में बुधवार की सुबह हुई। संजू देवी खेत पर गेहूं काटने के लिए खेत गई थी। तीन लड़कियां भी खेत की ओर गई थी। इसी दौरान अचानक तेज आंधी और बारिश आ गई। सभी लोग घर की ओर जाने लगे कि अचानक वज्रपात हो गया। संजू देवी और तीन लड़कियां इसकी चपेट में आ गए। इसमें से अंशु कुमारी की मौत हो गई। वहीं आंचल और मुस्कान की हालत गंभीर है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दूसरी घटना
वहीं, दूसरी घटना बलिया थाना क्षेत्र के भगतपुर गांव की है जहां वज्रपात से पति की मौत हो गई। पत्नी बुरी तरह झुलस गई है। मृतक की पहचान भगतपुर गांव वार्ड नंबर चार निवासी स्वर्गीय सुखदेव पासवान के 60 वर्षीय पुत्र विराल पासवान के रूप में हुई। जबकि पत्नी जितनी देवी गंभीर रूप से झुलस गई है। मृतक बिराल पासवान और उनकी पत्नी अपने घर से 200 मीटर की दूरी पर खेत में पड़े भूसे को उठा रहे थे तभी यह घटना हुई है।
मधुबनी में पिता-पुत्री और एक महिला की मौत
वहीं, मधुबनी जिले के दो अलग-अलग क्षेत्र में आसमान से आई आफत ने पिता पुत्री सहित एक महिला की जान ले ली। बताया जा रहा है कि अंधराठाढ़ी प्रखंड के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के अलपुरा गांव में 18 वर्षीय आयशा खातून और 62 वर्षीय जाकिर हुसैन दोनों पिता-पुत्री नहर किनारे अपने खेत में रखे गेहूं के बोरे को पानी से बचाने के लिए तिरपाल ढकने के लिए गए थे। उसी दौरान वज्रपात हो जाने से दोनों गंभीर रूप से झुलसकर घायल हो गए और घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई।
वहीं, झंझारपुर प्रखंड के अररिया संग्राम थाना क्षेत्र के पीपरोलिया गांव में वज्रपात में 45 वर्ष यह दुर्गा देवी की झुलस जाने से मौत हो गई। महिला अपने खेत में गेहूं की फसल देखने जा रही थी इस दौरान या घटना घट गई। आज सुबह आसमानी आफत के बाद हुई तीन मौत से दोनों के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो रो कर हाल बुरा है। पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मधुबनी सदर अस्पताल भेजने की प्रक्रिया में जुट गई है।
बिहार में क्यों कहर बनकर टूट रही आसमानी बिजली?
बिहार में वज्रपात से ज्यादा मौतों के कई कारण हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, मानसून के दौरान नमी और बारिश के पैटर्न में बदलाव और ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के दौरान लोगों का खुले में रहना शामिल है। यहां कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं:
- जलवायु परिवर्तन और मानसून: जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के दौरान नमी और बारिश के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिससे वज्रपात की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- ग्रामीण क्षेत्र और खेती: बिहार में अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती पर निर्भर है। मानसून के दौरान, लोग अपने खेतों में खुले में काम करते हैं, जिससे वज्रपात की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।
- नमी: बिहार में मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से बहुत अधिक नमी आती है, जो बिजली के लिए एक कंडक्टर का काम करती है, जिससे वज्रपात की संभावना बढ़ जाती है।
- समय: अधिकांश वज्रपात की घटनाएं दोपहर के समय होती हैं, जब लोग खेत में काम कर रहे होते हैं।
- चेतावनी की कमी: कई बार लोगों को वज्रपात से पहले चेतावनी नहीं मिल पाती है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों पर नहीं जा पाते हैं।
- प्राकृतिक आपदा के रूप में मान्यता: वज्रपात को अभी तक प्राकृतिक आपदा के रूप में मान्यता नहीं मिली है, जिससे प्रभावित परिवारों को उचित सहायता नहीं मिल पाती है।
बचाव के उपाय-
- चेतावनी प्रणाली: आपदा प्रबंधन विभाग ने 'इंद्रवज्र' नामक ऐप तैयार किया है, जो लोगों को वज्रपात से पहले चेतावनी देता है।
- जागरूकता अभियान: मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को वज्रपात से बचने के बारे में जानकारी दी जाती है।
- सुरक्षित स्थान: वज्रपात के दौरान खुले में रहने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर जाएं।
- चेतावनी के संकेत: वज्रपात के दौरान तेज आवाज या बिजली चमकने पर तुरंत सावधान हो जाएं और सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- धातु की वस्तुओं से दूर रहें: वज्रपात के दौरान धातु की वस्तुओं से दूर रहें जैसे कि बिजली के खंभे, धातु की बाड़ या पानी के पाइप।
- पानी से दूर रहें: वज्रपात के दौरान पानी से दूर रहें, जैसे कि नहाना, स्नान करना, या बहते पानी में खड़े होना।
- अंधेरा: वज्रपात के दौरान अंधेरा हो जाने पर भी सतर्क रहें और सुरक्षित स्थान पर रहें।
(रिपोर्ट- कुमार गौरव)
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