बिहार के गया में चल रहे पितृपक्ष मेले का आज 14वां दिन है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं के गया पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार को रूस से आईं पांच महिला श्रद्धालु फल्गु नदी के देवघाट पहुंचीं और अपने पितरों की मोक्ष व आत्मा की शांति की कामना को लेकर पूरे विधि-विधान से पिंडदान किया। खास बात यह रही कि सभी महिलाएं सनातनी वेशभूषा में थीं। जमीन पर बैठकर उन्होंने पुरोहितों के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना की और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। विदेशी महिलाओं को भारतीय परंपरा के अनुसार कर्मकांड करते देख देवघाट पर मौजूद लोग भी कुछ देर के लिए रुक गए।
धार्मिक महत्व जानने के बाद किया पिंडदान का फैसला
गया इस्कॉन मंदिर के के पुजारी जगदीश श्याम दास ने बताया कि पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड और उसके धार्मिक महत्व को जानने के बाद रूस की इन महिलाओं ने अपने पूर्वजों के लिए गया में पिंडदान करने का फैसला किया। जुलाई में रूस से कुछ विदेशी पर्यटक गया आए थे। इस दौरान वे इस्कॉन मंदिर पहुंचे, जहां उन्हें गया की धार्मिक महत्ता और पिंडदान की प्राचीन परंपरा के बारे में जानकारी दी गई। इस्कॉन की ओर से विदेशों में सनातन धर्म और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार का भी असर देखने को मिल रहा है। विदेशी श्रद्धालुओं में भारतीय धार्मिक परंपराओं को जानने और उन्हें करीब से अनुभव करने की रुचि बढ़ रही है।
इससे पहले भी कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी ऑस्ट्रेलिया,यूक्रेन,अफ्रीका समेत कई देशों से आए विदेशी श्रद्धालुओं गया में पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर चुके हैं।इस तरह पितृपक्ष मेले में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिल रही है।
सिर्फ घूमने नहीं, परंपरा समझने आ रहे विदेशी
इस्कॉन से जुड़े लोगों के अनुसार अब विदेशी श्रद्धालु सिर्फ पर्यटन के लिए गया नहीं पहुंच रहे हैं। वे यहां की धार्मिक मान्यताओं, तर्पण और पिंडदान की परंपरा को समझने में भी दिलचस्पी ले रहे हैं। देवघाट पर रूस की पांच महिलाओं का पिंडदान गया की उस धार्मिक पहचान को दिखाता नजर आया, जहां देश और भाषा की सीमाएं भी आस्था के सामने छोटी पड़ती दिखाई देती हैं।
( गया से अजित कुमार की रिपोर्ट )
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