नई दिल्ली: चीन की अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती का असर देश के हीरा उद्योग पर दिखने लगा है। चीन में मांग में 40 प्रतिशत कमी आने से भारत के हीरा उद्योग पर इसका असर हुआ है। हीरा उद्योग के संगठन जीजेईपीसी ने आज यह जानकारी दी है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के चेयरमैन विपुल शाह ने कहा, हम चीन के बाजारों में हीरा आभूषणों की मांग में आई कमी का असर महसूस कर रहे हैं। आर्थिक सुस्ती की वजह से चीन में हमारा बाजार हिस्सा 40 प्रतिशत कम हो गया है।
भारत से ही चीन का ज्यादातर तराशे गए हीरों का निर्यात किया जाता है। उन्होंने कहा, अप्रैल के बाद से चीजें बेहतर नहीं है। न केवल चीन में बल्कि दुनिया के दूसरे बाजारों में भी मांग लगातार गिर रही है। अमेरिकी डॉलर के दुनिया की दूसरी मुद्राओं के समक्ष मजबूत होने से भी इसमें गिरावट आई है।
चीन और पश्चिम एशिया जैसे दुनिया के दूसरे बाजारों में कमजोर पड़ती मांग से घरेलू व्यापारियों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा और रोजगार में भी कटौती की गई।
उन्होंने कहा, इस समय अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भरता है। हम अमेरिका के बाजारों को निर्यात बढ़ा रहे हैं। दूसरे बाजारों में इस समय समस्या है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में इस समय गड़बड़ी चल रही है। अमेरिकी डालर के मुकाबले ज्यादातर मुद्रायें नीचे चल रही हैं।
GJEPC आंकड़े के अनुसार इस साल जुलाई में भारत का कटे और तराशे हीरों का निर्यात 13 प्रतिशत घटकर 9,625.57 करोड़ रुपए रहा, जबकि एक साल पहले इसी माह में यह 11,126.02 करोड़ रुपए रहा था।
माता्र के लिहाज से कटे और तराशे गए हीरों का निर्यात 27.97 लाख कैरेट रह गया जबकि पिछले साल जुलाई में यह 32.62 लाख कैरेट रहा था।