नई दिल्ली: एक विशेष अदालत ने विकास मेटल एंड पावर लि. (वीएमपीएल) से जुड़े कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाला मामले में आगे जांच का आज आदेश दिया। अदालत ने कहा कि कंपनी के दावों का सत्यापन नहीं करने में सरकारी कर्मचारियों की तरफ से प्रथम दृष्ट्या साठगांठ का मामला लगता है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने कहा कि कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने मनमाने तरीके से काम किया और उन्होंने स्पष्ट रूप से न केवल अपनी स्थिति का दुरूपयोग किया बल्कि जनहित के खिलाफ काम किया। अदालत ने कहा कि पात्रता एवं अन्य दावों के संदर्भ में मेसर्स वीएमपीएल के आवेदनों की जांच नहीं करना प्रथम दृष्ट्या उनके बीच सक्रिय साठगांठ को जाहिर करता है।
न्यायाधीश ने कहा, सरकारी कर्मचारी केएस क्रोफा तथा केसी समारिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत मामला चलाने की मंजूरी की जरूरत को देखते हुए निजी पक्ष से जुड़े या सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ संग्यान लेने से पहले मैं यह उपयुक्त मानता हूं कि सीआरपीसी आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत इस मामले को आगे की जांच के लिये सीबीआई के पास भेजा जाए।
अदालत ने सीबीआई द्वारा आगे की जांच के संबंध में प्रगति रिपोर्ट जमा करने के लिये 24 अगस्त की तारीख मुकर्रर की। अदालत का यह आदेश ऐसे मामले में आया है जिसमें सीबीआई ने इस साल सात अप्रैल को पूरक अंतिम रिपोर्ट जमा की थी। अदालत ने पिछले मामले को बंद करने की रिपोर्ट को स्वीकार करने से मना कर दिया था और एजेंसी को मामले की आगे की जांच करने का आदेश दिया था।