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सेबी ने स्टार्ट-अप के लिए सूचीबद्धता, धन जुटाने के नियमों में दी ढील

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 24, 2015 08:46 am IST,  Updated : Jun 24, 2015 08:47 am IST

मुंबई: पूंजी बाजार नियामक सेबी ने नई शुरू हो रही (स्टार्टअप) कंपनियों के लिए सूचीबद्धता व बाजार से धन जुटाने के नियमों में आज ढील दी ताकि वे भारत में सूचीबद्ध हो सकें। सेबी के

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सेबी ने स्टार्ट-अप के लिए सूचीबद्धता, धन जुटाने के नियमों में दी ढील

मुंबई: पूंजी बाजार नियामक सेबी ने नई शुरू हो रही (स्टार्टअप) कंपनियों के लिए सूचीबद्धता व बाजार से धन जुटाने के नियमों में आज ढील दी ताकि वे भारत में सूचीबद्ध हो सकें। सेबी के इस कदम का ई-कामर्स कंपनियों तथा अन्य नए दौर के उद्यमों ने स्वागत किया है।

   
इन नए नियमों का उद्देश्य भारतीय उद्यमियों व उनकी प्रौद्योगिकी व अन्य स्टार्टअप कंपनियों को भारत में ही बने रहने को प्रोत्साहित करना है ताकि वे धन जुटाने के लिए विदेश जाने की न सोचें।
   
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल ने नए नियमों को आज मंजूरी दी। इसके तहत स्टाक एक्सचेंजों के पास ई-कामर्स सहित अन्य नए क्षेत्रों के स्टार्ट-अप की सूचीबद्धता के लिए अलग संस्थागत व्यापार प्लेटफार्म होगा। इनमें न्यूनतम दस लाख रपए के निवेश की जरूरत होगी। हालांकि, छोटे खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों को निवेश की अनुमति नहीं होगी। छोटे निवेशकों को दूर रखने के लिए निवेश की सीमा उंची रखी गई है क्योंकि इस तरह के निवेश में जोखिम अधिक हो सकता है।
   
इसी तरह इन फर्मों की सूचीबद्धता के लिए सेबी ने प्रवर्तकों व सूचीबद्धता से पहले के निवेशकों के लिए अनिवार्य लॉक-इन (निवेशक बने रहने) की न्यूनतम अवधि को घटाकर छह महीने कर दी है। अन्य कंपनियों के लिए यह अवधि तीन साल है।
   
सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा ने बोर्ड बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि इसी तरह इन कंपनियों के लिए खुलासा नियमों में भी ढील दी गई है।
   
उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के लिए निर्गम पूर्व कम से कम 25 प्रतिशत पूंजी संस्थागत निवेशकों के पास होनी चाहिए। अन्य क्षेत्रों की कंपनियों के लिए यह 50 प्रतिशत होगी।

बड़े पैमाने पर आ रहे हैं खुदरा निवेशक

बाजार नियमाक सेबी ने पूंजी बाजारों में सुधार के अनेक उपायों की घोषणा करते हुए कहा कि खुदरा निवेशक बड़े पैमाने पर आ रहे हैं और वे विदेशी निवेशकों का प्रभावी जवाबी संतुलन बन सकते हैं।
     
उल्लेखनीय है कि भारतीय बाजार पारंपरिक रूप से विदेशी निवेशकों पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं और देश में सार्वजनिक रूप से कारोबार वाले शेयरों में से लगभग आधे पर उनका स्वामित्व है।
    
सेबी ने IPO बाजार तथा अन्य खंडों के लिए अनेक सुधारों की घोषणा की। सेबी की बोर्ड बैठक के बाद चेयरमैन यू के सिन्हा ने कहा कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी पर संदेश बहुत सकारात्मक है।

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