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दिल्ली उच्च न्यायालय को मिलेंगे 7 नए जज, जजों की कुल संख्या बढ़कर हो जाएगी 50

 Published : Sep 21, 2026 08:42 am IST,  Updated : Sep 21, 2026 08:48 am IST

दिल्ली की अधीनस्थ अदालतों के सात न्यायिक अधिकारी सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ लेंगे, जिससे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।

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दिल्ली उच्च न्यायालय को मिलेंगे 7 नए जज Image Source : ANI

दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को यानी आज दिल्ली की अधीनस्थ अदालतों के सात न्यायिक अधिकारी न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही उच्च न्यायालय में जजों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय सुबह 10 बजे अदालत परिसर में आयोजित समारोह में सभी नए जजों को शपथ दिलाएंगे। शपथ लेने वाले न्यायिक अधिकारियों में निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय को मिलेंगे 7 नए जज

ये सभी अब तक जिला न्यायपालिका में अपनी सेवाएं दे रहे थे। शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को इन नियुक्तियों की अधिसूचना जारी की थी। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पद 60 हैं और इन 7 नई नियुक्तियों के साथ हाईकोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या 50 हो जाएगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय का इतिहास

दिल्ली उच्च न्यायालय की शुरुआत 31 अक्टूबर 1966 को हुई थी। लेकिन इससे पहले दिल्ली का न्यायिक इतिहास कई बदलावों से होकर गुजरा:

  • शुरुआत में 1919 में बने लाहौर हाईकोर्ट के पास ही पंजाब और दिल्ली दोनों का कामकाज देखने का अधिकार था और 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे तक यही व्यवस्था चलती रही।
  • फिर 15 अगस्त 1947 को 'पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट' बनाया गया। जिसका काम शिमला की पीटरहॉफ इमारत से शुरू हुआ, लेकिन जनवरी 1981 में यह इमारत जलकर खाक हो गई।
  • 1954-55 में जब पंजाब सरकार का कामकाज चंडीगढ़ चला गया, तो हाईकोर्ट भी चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया। तब यह पंजाब हाईकोर्ट के नाम से जाना जाने लगा और दिल्ली के मामलों की सुनवाई के लिए इसकी एक सर्किट बेंच बनाई गई।
  • फिर दिल्ली की बढ़ती आबादी और इसके महत्व को देखते हुए संसद ने 5 सितंबर 1966 को दिल्ली हाईकोर्ट एक्ट पास किया और 31 अक्टूबर 1966 को दिल्ली को अपना अलग हाईकोर्ट मिल गया।
  • शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के मामले भी देखता था। शिमला की 'रेवेन्सवुड' इमारत में इसकी एक बेंच बैठती थी। 25 जनवरी 1971 को जब हिमाचल पूर्ण राज्य बना, तब यह व्यवस्था खत्म हुई।
  • जब दिल्ली हाईकोर्ट बना था, तब इसमें सिर्फ 4 जज थे - चीफ जस्टिस के.एस. हेगड़े, जस्टिस आई.डी. दुआ, जस्टिस एच.आर. खन्ना और जस्टिस एस.के. कपूर। समय के साथ जजों की संख्या बढ़ती गई और आज यहां कुल 60 पद (45 स्थायी और 15 अतिरिक्त जज) मंजूर हैं। 

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