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'दिल्ली में प्रदूषण से OPD में आई मरीजों की बाढ़', डॉक्टरों ने बताया किन लोगों को ज्यादा खतरा

 Published : Nov 06, 2025 01:17 pm IST,  Updated : Nov 06, 2025 01:17 pm IST

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्पतालों की OPD में मरीजों की संख्या 25% तक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार, दमा, COPD और फेफड़े की पुरानी बीमारियों वाले मरीजों की हालत बिगड़ रही है। विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह व्यायाम और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।

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दिल्ली में पिछले कई दिनों से प्रदूषण के चलते बुरा हाल है। Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। गुरुवार को डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि राजधानी में सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हो गया है। लोग गले में खराश, नाक बहना, आंखों में खुजली और सीने में भारीपन जैसी शिकायतों से परेशान हैं। कुछ मरीजों में दमा, COPD, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज और अन्य पुरानी फेफड़े या दिल की बीमारियों के लक्षण भी बदतर हो गए हैं। PGIMER के प्रोफेसर डॉक्टर पुलिन गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण की वजह से OPD मरीजों से खचाखच भरी हुई है। सांस की बीमारियों में 22-25 फीसदी का इजाफा हुआ है।

किन लोगों को गंभीर बीमारी होने का ज्यादा खतरा?

डॉ. गुप्ता ने कहा, 'प्रदूषण के कारण OPD में सांस की बीमारियों जैसे ब्रॉन्काइटिस, दमा के तेज हमले वाले मरीजों की बाढ़ आई हुई है। ईएनटी OPD में साइनसाइटिस, नाक बहना और नाक से खून आने की शिकायतें बढ़ गई हैं। चर्म रोग (डर्मेटाइटिस) के मरीज भी ज्यादा आ रहे हैं। आंखों में सूखापन, पानी आना, लालिमा और नजर कमजोर होने की समस्या बढ़ी है। सांस की क्लिनिक में प्रदूषण से जुड़ी सभी बीमारियों के मरीज 22-25 फीसदी ज्यादा हैं। जिन लोगों को ब्रॉन्कियल अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस है या जो पुराने धूम्रपान करने वाले हैं, बुजुर्ग हैं या जिन्हें पहले टीबी हुई है, उन्हें प्रदूषण से गंभीर बीमारी होने का खतरा ज्यादा है।'

'दमा और COPD के मरीजों में लक्षण बदतर हो रहे हैं'

सर गंगा राम अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और वाइस चेयरमैन डॉ. बॉबी भालोत्रा ने कहा कि इस साल दिल्ली की हवा सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। यह अचानक सर्दी शुरू होते ही हुआ है। डॉ. भालोत्रा ने बताया, 'यह इस साल की सबसे खतरनाक हवा की गुणवत्ता है, खासकर जब सर्दी की शुरुआत के साथ अचानक ऐसा हुआ है। नए मरीज गले में खराश, राइनाइटिस, नाक बहना, आंखों में खुजली और सीने में भारी दर्द लेकर आ रहे हैं। मौसम बहुत खराब है। दमा, सीओपीडी के मरीजों में लक्षण बदतर हो रहे हैं। ILD या कोई पुरानी फेफड़े या दिल की बीमारी वाले मरीज भी प्रभावित हैं। बच्चों, बुजु्र्गों और पुरानी बीमारियों वाले मरीजों को ज्यादा खतरा है।'

सुबह 8 बजे शहर का कुल AQI 271 दर्ज किया गया

इस बीच, दिल्ली की हवा की गुणवत्ता गुरुवार सुबह और खराब हो गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सुबह 8 बजे शहर का कुल AQI 271 दर्ज किया गया। तुलना करें तो 5 नवंबर को दोपहर 4 बजे AQI 202 था। हालांकि हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में ही है, लेकिन शहर के कई इलाकों पर असर पड़ा है। CPCB डेटा के मुताबिक, बुरारी क्रॉसिंग में AQI 280 रहा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार, द्वारका सेक्टर-8 में AQI 296 था। ITO में AQI 295 रहा, जो खराब श्रेणी में है। बुधवार सुबह 9 बजे ITO में AQI 274 था। नरेला में ‘बहुत खराब’ AQI 302 दर्ज हुआ। बवाना में भी यही हाल रहा, जहां हवा की गुणवत्ता 337 पर बहुत खराब श्रेणी में रही। वहीं, दिलशाद गार्डन में AQI 183 रहा, जो मध्यम श्रेणी में आता है।

'जॉगिंग या कोई मेहनत वाला शारीरिक काम न करें'

दिल्ली की हवा खराब होने पर डॉ. भालोत्रा ने लोगों को बाहर खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी। उन्होंने सरकार से हाइब्रिड वर्क का विकल्प लाने की अपील की। डॉ. भालोत्रा ने कहा, 'बाहर कोई भी गेम न खेलें। जॉगिंग या कोई मेहनत वाला शारीरिक काम न करें। बुजुर्गों से कहता हूं कि सुबह जल्दी घर से बाहर न निकलें और मॉर्निंग वॉक न करें। सूरज निकलने के बाद मास्क लगाकर टहल सकते हैं। सरकार को हाइब्रिड विकल्प लाना चाहिए। वाहनों से होने वाला प्रदूषण और पार्टिकुलेट मैटर ज्यादा है। हाइब्रिड एक अच्छा तरीका है।' (ANI)

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