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दिल्ली की सड़कों का होगा कायाकल्प, रेखा गुप्ता सरकार ने 657.99 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी

 Reported By: Bhaskar Mishra Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jun 24, 2026 09:19 pm IST,  Updated : Jun 24, 2026 09:21 pm IST

दिल्ली की सड़कों को लेकर एक बड़ी अहम जानकारी सामने आई है। दरअसल दिल्ली सरकार ने राजधानी की सड़कों का कायाकल्प करने का फैसला ले लिया है।

Rekha Gupta- India TV Hindi
सीएम रेखा गुप्ता Image Source : REKHA GUPTA/X

नई दिल्ली: पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के 270 किमी. प्रमुख मार्गों की गुणवत्ता सुधरेगी और आधुनिक मानकों के अनुरूप कायाकल्प होगा। राजधानी में पहली बार ‘जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली’ लागू होगी। सड़क सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान है और धूल नियंत्रण के लिए सीएक्यूएम के मानकों का कड़ा पालन होगा।

सड़कों को लेकर अहम फैसला

आज राजधानी की सड़कों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आज व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में 270.63 किलोमीटर लंबाई की विभिन्न सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए 657.99 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से राजधानी की सड़कों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर बनाया जाएगा। इस निर्णय से पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के अनेक प्रमुख मार्गों की गुणवत्ता में सुधार होगा और सड़क अवसंरचना को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ किया जा सकेगा।

इस परियोजना के तहत पीडब्ल्यूडी के पूर्वी मेंटेनेंस जोन में 58.292 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर 147.08 करोड़ रुपये, उत्तरी मेंटेनेंस जोन में 104.42 किलोमीटर लंबी सड़कों पर 247.31 करोड़ रुपये और दक्षिणी मेंटेनेंस जोन में 107.92 किलोमीटर लंबी सड़कों पर 263.61 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत व्यय की जाएगी।

परियोजना के तहत क्या-क्या काम होंगे?

इस परियोजना के अंतर्गत सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए कोल्ड मिलिंग (पुरानी और खराब हो चुकी सड़क की ऊपरी परत को मशीन से हटाना), डेंस बिटुमिनस मैकाडम (सड़क को मजबूत बनाने के लिए डामर और पत्थर की मोटी आधार परत बिछाना) और बिटुमिनस कंक्रीट (सड़क की सबसे ऊपरी चिकनी और टिकाऊ परत बिछाना) का कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त टैक कोट (पुरानी और नई सड़क परत के बीच मजबूत चिपकाव के लिए विशेष कोटिंग करना), रोड मार्किंग (सड़क पर लेन, ज़ेब्रा क्रॉसिंग और अन्य यातायात संकेतों की मार्किंग करना), रोड फर्नीचर (साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर, डिवाइडर मार्कर, सुरक्षा बैरियर आदि लगाना) और कर्ब चैनल (सड़क किनारे कंक्रीट के कर्ब और बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था बनाना) सहित सभी आवश्यक कार्य किए जाएंगे, जिससे सड़कों की संरचनात्मक मजबूती, गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन में उल्लेखनीय सुधार होगा।

पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली अपनाई जा रही

दिल्ली में पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली अपनाई जा रही है, जिससे कार्यों के निष्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे आधुनिक मशीनरी और तकनीक का बेहतर उपयोग हो सकेगा, कार्यों की गुणवत्ता पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और निर्माण के बाद रखरखाव की जवाबदेही भी तय होगी। दिल्ली सरकार केवल निर्माण कार्यों पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान दे रही है। सभी परियोजनाओं में पांच वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि निर्धारित की गई है। 

विशेष बात यह है कि लाइबिलिटी अवधि के दौरान अगर किसी सड़क में गड्ढा होता है तो उसे 48 घंटे में भरा जाएगा। कार्यों की प्रगति जीएसडीएल/डीपीएमजी पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। कार्य शुरू होने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य पूर्ण होने के बाद जियो-टैग्ड फोटोग्राफ भी अपलोड किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) द्वारा स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। इस कार्य को अक्टूबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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