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दिल्ली जू में बढ़े 'मेहमान': हिरण की संख्या तीन गुना, चीतल-संगाई भी क्षमता से अधिक; बाड़ों में बढ़ रही आपसी लड़ाई

 Published : Jun 23, 2026 11:42 pm IST,  Updated : Jun 23, 2026 11:42 pm IST

दिल्ली स्थिति चिड़ियाघर में काले हिरण (ब्लैकबक), चित्तीदार हिरण (चीतल), संगाई हिरण और बार्किंग हिरण की संख्या उनके बाड़ों की क्षमता से कहीं अधिक हो गई है। वहीं कुछ प्रजातियों की संख्या तो तय सीमा के तीन गुना से भी अधिक हो गई है।

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दिल्ली के चिड़ियाघर में काले हिरण और चीतल की संख्या क्षमता से अधिक (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : PEXELS

Delhi News: दिल्ली के चिड़ियाघर के बाड़ों में अब हिरणों को रखने की जगह कम पड़ने लगी है। यहां काले हिरण और चीतल, संगाई और बार्किंग हिरणों की तादाद तय क्षमता को पार कर चुकी है। वहीं कुछ प्रजातियों की संख्या तो निर्धारित सीमा से तीन गुना से भी ज्यादा हो गई है, जिससे चिड़ियाघर प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल के वर्षों में इन शाकाहारी वन्यजीवों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने के निरंतर प्रयासों के बाद भी इनकी आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी काले हिरण की आबादी में देखी गई है, जिनकी संख्या तय क्षमता 40 के मुकाबले 143 तक पहुंच गई है।

अधिकारी ने बताया कि चीतल की संख्या तय क्षमता 30 के मुकाबले 85 है, जबकि काले मृग की आबादी 20-25 की तय सीमा के मुकाबले 80 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि इसी तरह संगाई हिरण की आबादी 20 की क्षमता के मुकाबले 66 है, 'बार्किंग हिरण' (पाड़ा या काकर हिरण) 20 के मुकाबले 56, सांभर की संख्या तय क्षमता 20 के मुकाबले 36, नीलगाय की संख्या 20 के मुकाबले 36 और जंगली सूअर की संख्या चार के मुकाबले 15 है।

बाड़ों पर दबाव कम करने के लिए राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने पिछले दो-तीन वर्षों में अतिरिक्त शाकाहारी जानवरों को वन्यजीवों के लिए बनी दूसरी जगहों पर भेजा है। उन्होंने कहा, 'लगभग 110 जानवरों को गुजरात में 'वंतारा' भेजा गया, जबकि आबादी को संभालने की कोशिशों के तहत 150 से अधिक जानवरों (जिनमें काले हिरण, संगाई हिरण और 'बार्किंग हिरण' शामिल हैं) को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स स्थित बाघ संरक्षित क्षेत्र में भेजा गया।' यह चुनौती सिर्फ स्तनधारी जानवरों तक ही सीमित नहीं है। 

दिल्ली चिड़ियाघर में 'ओवरक्राउडिंग'

चिड़ियाघर के अधिकारी ने बताया कि प्रवासी पक्षी प्रजाति 'पेंटेड स्टॉर्क' की संख्या 25 की तय क्षमता के मुकाबले लगभग 90 है। उनके अनुसार, जंगली मुर्गे (जंगल फाउल) की आबादी 15 की तय सीमा के मुकाबले 44 है। उन्होंने कहा कि जानवरों को दूसरी जगहों पर भेजने के बावजूद, कई शाकाहारी जानवरों की आबादी अभी भी तय सीमा से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि क्षमता से अधिक आबादी होने से जानवरों को आजादी से घूमने और स्वाभाविक व्यवहार करने के लिए जरूरी जगह की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। 

अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे जानवरों की संख्या बढ़ती है, बाड़ों और उनसे जुड़ी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ता है, जिसके लिए अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत होती है। चिड़ियाघर के अधिकारी के अनुसार, अधिक भीड़-भाड़ होने से कभी-कभी जानवरों के बीच हिंसक व्यवहार देखने को मिल सकता है। हिरणों के बाड़े में जगह कम होने पर जानवरों के बीच लड़ाई होना आम बात है और कभी-कभी इससे उन्हें ऐसी चोटें लग जाती हैं जिनके लिए पशु-चिकित्सक की मदद लेनी पड़ती है।

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