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मुहर्रम पर दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती, ड्रोन से रखी जाएगी नजर

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jun 24, 2026 10:26 pm IST,  Updated : Jun 24, 2026 10:32 pm IST

दिल्ली में कई इलाकों में ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं। बड़े जुलूस मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी दिल्ली और पुरानी दिल्ली में निकाले जाते हैं। इसके मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंजताम किए हैं।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : PTI

नई दिल्ली: इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 10वीं तारीख यानी 'आशूरा' पर शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में निगरानी के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।

2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती

जुलूस के दौरान मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन दोनों जिलों में 2,000 से अधिक स्थानीय पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को तैनात किया जा रहा है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राहुल अलवल ने बताया कि उनके क्षेत्र में 1,100 स्थानीय पुलिसकर्मियों के अलावा सुरक्षा बलों की 20 कंपनियां तैनात होंगी। वहीं, उत्तरी दिल्ली के डीसीपी राजा बंठिया के मुताबिक, उनके जिले में 5 एसीपी, 37 निरीक्षक और 924 अन्य पुलिस कर्मियों के साथ बाहरी सुरक्षा बल मोर्चा संभालेंगे।

ड्रोन और फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल

सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए दिल्ली पुलिस आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। भीड़ पर हवाई नजर रखने के लिए कुल 14 ड्रोन तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, संदिग्ध और आपराधिक तत्वों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा। संवेदनशील मोर्चों पर वीडियोग्राफर, दंगा नियंत्रण उपकरण और त्वरित कार्रवाई टीमें मुस्तैद रहेंगी।

अमन कमेटियों के साथ बैठकें

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों, भाईचारा समितियों और अमन कमेटियों के साथ थाना स्तर से लेकर डीसीपी स्तर तक करीब 21 दौर की बैठकें की हैं। इस साल आशूरा शुक्रवार को होने के कारण जुमे की नमाज के बाद दोपहर 3 बजे से जुलूस निकाला जाएगा।

आयोजक संगठन 'अंजुमन ताजियादरान' के मुख्य संरक्षक परवेज नूर ने बताया कि जामा मस्जिद और पुल बंगश से निकलने वाले मुख्य जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए पहाड़गंज में एकजुट होंगे और वहां से जोर बाग स्थित करबला पहुंचेंगे। सुरक्षा को सुचारू बनाए रखने के लिए हर ताजिए के साथ 10 विशेष स्वयंसेवक भी मौजूद रहेंगे।

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