दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में नए एकेडमिक सेशन में मेडिकल यूजी और पीजी कोर्स करने वाले छात्रों के लिए एक जरूरी खबर है। राष्ट्रीय राजधानी के मेडिकल कॉलेजों ने एकेडमिक सेशन 2025-26 एमबीबीएस, पीजी कोर्स के छात्रों के लिए एक साल की अनिवार्य बॉन्ड सर्विस लागू कर दी है। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के एडमिशन ब्राउचर की मानें तो, अब एमबीबीएस, पीजी कोर्स करने वाले छात्रों को 1 साल का बॉन्ड सर्विस कोर्स खत्म करने के बाद पूरा करना होगा। इस बॉन्ड सर्विस में छात्रों के इंटर्नशिप प्रोग्राम भी शामिल हैं।
दिल्ली मेडिकल कॉलेजों ने ऑल इंडिया और स्टेट कोटे के अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए यह एक वर्षीय सेवा बॉन्ड लागू किया है। इसके तहत दिल्ली में जीएनसीटी के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेजों में एक साल तक अपनी सेवा देनी होगी। यह बॉन्ड पॉलिसी पिछले साल 19 सितंबर को दिल्ली सरकार द्वारा शुरू हो गई थी।
देनी होगी एडवांस में इतनी राशि
नई पॉलिसी के मुताबिक, सुपर स्पेशलिटी समेत एमबीबीएस छात्रों को एडमिशन के समय 15 लाख और पीजी स्टूडेंट्स को एडमिशन के समय 20 लाख रुपये जमा करना होगा। यदि छात्र इस अनिवार्य सर्विस पीरिएड से बाहर निकलने का फैसला करते हैं तो यह राशि जब्त कर ली जाएगी।
किस-किस मेडिकल कॉलेज में हुआ लागू?
- एम्स दिल्ली
- लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज
- मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज
- यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज
- डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज
- अटल बिहार वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान
- ईएसआई पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च
- वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरगंज अस्पताल
किसे होगा नुकसान या फायदा?
दिल्ली सरकार ने पिछले साल एकेडमिक सेशन 2025-26 के मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए यह सर्विस बॉन्ड लागू करने की घोषणा की थी। जानकारी दे दें नीट पीजी बॉन्ड पॉलिसी तीन तरह की है- सर्विस बॉन्ड, सीट लीविंग बॉन्ड और बैंक गारंटी। दिल्ली उन राज्यों में से था जहां यह सर्विस बॉन्ड लागू नहीं थी। ऐसे में बता दें कि उन छात्रों के लिए यह नुकसान है, जो कोर्स करते ही किसी प्राइवेट अस्पताल में ऊंची सैलरी पर नौकरी करते थे, अब उन्हें यह मौका एक साल बाद मिलेगा। हालांकि सरकार के इस फैसले अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पूरी हो सकेगी और आम लोगों को लंबी-लंबी लाइन से छुटकारा मिल सकेगा।
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