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स्कूलों, कॉलेजों को खोले जाने की तैयारियों पर संसदीय समिति की बैठक

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 11, 2020 05:04 pm IST,  Updated : Aug 11, 2020 05:04 pm IST

मानव संसाधन विकास मामलों से संबंधित संसदीय समिति सोमवार को देशभर के स्कूल और कॉलेजों को खोले जाने की तैयारियों पर चर्चा करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।

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Parliamentary committee meeting on preparations to open schools, colleges Image Source : PTI

नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मामलों से संबंधित संसदीय समिति सोमवार को देशभर के स्कूल और कॉलेजों को खोले जाने की तैयारियों पर चर्चा करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। इस संसदीय समिति के अध्यक्ष राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे हैं। सोमवार को आयोजित की जा रही इस संसदीय समिति की बैठक का एजेंडा कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों और उच्च व तकनीकी शिक्षा क्षेत्र की तैयारी पर चर्चा करना है। शिक्षा मंत्रालय की यह संसदीय समिति की दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान इस विषय पर गौर करेगी कि स्कूल-कॉलेज खोलने को लेकर क्या स्थिति है।

दरअसल, सरकार को मिले फीडबैक के मुताबिक, फिलहाल अधिकांश अभिभावक नहीं चाहते कि अभी स्कूल खोले जाएं। अभिभावकों के सबसे बड़े राष्ट्रीय संगठन 'ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा, "हमने शिक्षा मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री के समक्ष मुख्य रूप से तीन विषय रखे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि जब तक कोरोना पर पूरी तरह से काबू नहीं पा लिया जाता, तब तक स्कूल नहीं खुलने चाहिए।"

अभिभावक चाहते हैं कि इस वर्ष स्कूलों में पूरे शैक्षणिक सत्र को ही जीरो सत्र माना जाए। इस मांग को लेकर कई अभिभावकों ने सहमति जताई है। दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे स्कूल खोले जाने के विषय पर अभिभावकों की राय जानने की कोशिश करें।

अशोक अग्रवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा देशभर के सभी मुख्यमंत्रियों को हमने ऐसे ही पत्र लिखे हैं। अभिभावकों के इस संघ ने सरकारों से मांग की है कि इस शैक्षणिक सत्र को जीरो एकेडमिक ईयर घोषित घोषित किया जाए। सभी छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट किया जाए। अगले वर्ष का पाठ्यक्रम इस तरह से मॉडिफाई किया जाए कि छात्र उसे समझ सके और अपनी पढ़ाई कर सके।"

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