फिल्ममेकर नितेश तिवारी इन दिनों अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे सितारों से सजी इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। हालांकि, नितेश तिवारी के लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया और फिर विज्ञापन की दुनिया में अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारते हुए फिल्म निर्देशन का रास्ता चुना। आज वह 'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी सफल फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी नितेश ने फिल्ममेकर बनने के बारे में सोचा तक नहीं था? हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने अपने आईआईटी के दिनों, लेखन के प्रति रुचि और कॉरपोरेट नौकरी के अनुभवों को साझा किया।
IIT बॉम्बे में पढ़ाई के दौरान जागा लेखन का शौक
नितेश तिवारी का जन्म 22 मई 1973 को मध्य प्रदेश के इटारसी में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जी एंड मैटेरियल साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 1996 में ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई के दौरान ही उनकी दिलचस्पी रचनात्मक गतिविधियों की तरफ बढ़ने लगी थी। एक बातचीत में उन्होंने बताया कि आईआईटी में पढ़ाई करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें कुछ नया और अलग करने में खुशी मिलती है। नितेश के मुताबिक कॉलेज के हॉस्टल में अलग-अलग तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, जिनमें छात्र मौलिक विचारों के साथ हिस्सा लेते थे। यहां तक कि दोस्तों के साथ होने वाले मजाक और शरारतों में भी रचनात्मकता दिखाई देती थी। दूसरों से अलग और अप्रत्याशित कुछ करने की यही सोच उन्हें पसंद आने लगी। धीरे-धीरे उन्होंने लिखना शुरू किया और नाटक, एकांकी तथा मोनो एक्टिंग के लिए रचनाएं तैयार करने लगे। वह कोशिश करते थे कि उनकी लिखी चीजों में कुछ नया हो, जो दर्शकों को चौंकाए और उनका ध्यान खींचे। नितेश का मानना है कि लेखन के दौरान विकसित हुई मौलिकता की यह आदत आज भी उनके काम का हिस्सा है।
इंजीनियरिंग के बाद भी नहीं पता था कि बनेंगे फिल्ममेकर
आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था से पढ़ाई करने के बाद आमतौर पर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की उम्मीद की जाती है। नितेश तिवारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने बताया कि उनके समय में पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए डॉक्टर या इंजीनियर बनना करियर के प्रमुख विकल्प माने जाते थे। हालांकि पढ़ाई के दौरान उनके मन में लेखक बनने की इच्छा जरूर पैदा हुई थी, लेकिन उन्हें यह भरोसा नहीं था कि वह इसे अपना पेशा बना पाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फिल्ममेकर बनने का फैसला कर लिया था तो उन्होंने इससे इनकार किया। उनके मुताबिक उस समय उनके मन में लेखक बनने की चाहत थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि आगे चलकर यही उनका करियर बनेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि करियर चुनते समय कई बार व्यक्ति खुद भी अपनी असली रुचि और क्षमता को पूरी तरह नहीं समझ पाता। नितेश की कहानी बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा शुरुआत में तय नहीं होता, कई बार अनुभव ही इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचाते हैं।
चार महीने सॉफ्टवेयर कंपनी में भी किया काम
फिल्मों की दुनिया में आने से पहले नितेश तिवारी ने सॉफ्टवेयर कंपनी में भी काम किया था। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब चार महीने तक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया। हालांकि, इस नौकरी में उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली, जिसकी उन्हें तलाश थी। नितेश ने अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि वह ऐसा काम करना चाहते थे, जिसे करने में उन्हें खुशी मिले। वह केवल इसलिए किसी पेशे में नहीं रहना चाहते थे कि उनसे वही काम करने की अपेक्षा की जा रही है। उनके लिए अपने मन का काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण था। यही सोच उन्हें धीरे-धीरे रचनात्मक क्षेत्र की ओर ले गई। इसके बाद उन्होंने विज्ञापन की दुनिया में काम किया, जहां कहानी कहने, विचारों को प्रभावी ढंग से पेश करने और दर्शकों से जुड़ने की उनकी क्षमता को नया आयाम मिला।
'चिल्लर पार्टी' से शुरू हुआ निर्देशन का सफर
विज्ञापन जगत में अनुभव हासिल करने के बाद नितेश तिवारी ने फिल्मों का रुख किया। साल 2011 में उन्होंने विकास बहल के साथ 'चिल्लर पार्टी' का सह-निर्देशन किया। बच्चों की दोस्ती और उनके संघर्षों पर आधारित इस फिल्म को खूब सराहना मिली। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता। इस शुरुआत ने नितेश को एक ऐसे फिल्ममेकर के रूप में पहचान दिलाई, जो भावनात्मक कहानियों को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर पेश कर सकते हैं। इसके बाद साल 2014 में उन्होंने 'भूतनाथ रिटर्न्स' का निर्देशन किया। लेकिन उनके करियर को सबसे बड़ी पहचान 2016 में रिलीज हुई आमिर खान अभिनीत 'दंगल' से मिली। भारतीय महिला पहलवान गीता और बबीता फोगाट की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म ने देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन किया। चीन में भी फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली। 'दंगल' के लिए नितेश को फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार मिला।
'छिछोरे' से 'बवाल' तक बनाई अलग पहचान
साल 2019 में नितेश तिवारी ने सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर अभिनीत 'छिछोरे' का निर्देशन किया। दोस्ती, असफलता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बनी इस फिल्म ने युवाओं को खास तौर पर प्रभावित किया। फिल्म को बाद में हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने 2023 में वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की फिल्म 'बवाल' का निर्देशन किया। अब नितेश तिवारी 'रामायण' के जरिए एक बार फिर बड़े स्तर पर अपनी कहानी कहने की क्षमता दिखाने जा रहे हैं। रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका में हैं। दो भागों में बनाई जा रही इस फिल्म में भव्य विजुअल इफेक्ट्स के लिए डीएनईजी और संगीत के लिए एआर रहमान तथा हंस जिमर जुड़े हैं।