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नाना पाटेकर को आखिरी समय में सता रही थी बेटे की चिंता, जाते-जाते कहे थे ये 15 शब्द, याद करके भावुक हुए मल्हार

 Written By: Priya Shukla
 Published : Oct 09, 2026 07:45 am IST,  Updated : Oct 09, 2026 07:45 am IST

गुरुवार को पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव में नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के साथ उन्हें आखिरी श्रद्धांजलि दी गई। गुरुवार को दिग्गज अभिनेता ने 75 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

Nana Patekar- India TV Hindi
पिता नाना पाटेकर के साथ मल्हार पाटेकर। Image Source : MALHAR PATEKAR FB

हिंदी और मराठी सिनेमा के शिखर पुरुष कहे जाने वाले नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं रहे। 8 अक्टूबर की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से 75 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लगभग 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव पुणे लाया गया, जहां देर रात डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस के पास उनका अंतिम संस्कार किया गया। नाना पाटेकर के बेटे मल्हार ने उन्हें मुखाग्नि दी। लोगों को उम्मीद थी कि नाना के अंतिम दर्शन के लिए परिवार उनके पार्थिव शरीर रखेगा। लेकिन देर रात को ही परिवार ने अंतिम संस्कार कर उन्हें अंतिम विदाई दे दी। अब उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने खुलासा किया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।

पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर

8 अक्टूबर की देर रात नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार ने भारी मन से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की और नाना के पैर छूकर उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति भी मौजूद रहीं और बेहद गमगीन नजर आईं। लेकिन, अब सभी के मन में ये सवाल है कि आखिर देर रात नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार क्यों किया गया?

आधी रात में क्यों हुआ अंतिम संस्कार?

नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद बेटे मल्हार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि देर रात अंतिम संस्कार करने का कोई खास वजह नहीं थी। उन्होंने बताया, क्योंकि गुरुवार की सुबह ही उनकी मौत हो गई थी और समय काफी ज्यादा बीत गया था, इसलिए परिवार ने देर रात ही अंतिम क्रिया का फैसला किया। उन्होंने बताया कि धार्मिक विधियों और मंत्रोच्चार के साथ उनके पिता का अंतिम संस्कार किया गया। 

पिता को याद कर भावुक हुए मल्हार

मल्हार पिता नाना पाटेकर को याद करते हुए भावुक हो गए और कहा कि नाना साहेब जैसे लोग वास्तव में कभी नहीं जाते। वह हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहते हैं। मल्हार के अनुसार, उनके पिता का नजरिया हमेशा एक जैसा रहा और इसी दौरान उन्होंने पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा- 'जब नाना साहेब से बात हुई तो वह खुद से ज्यादा मेरे लिए परेशान थे। मेरी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी और वो इसे लेकर काफी परेशान थे। आखिरी बातचीत में उन्होंने मुझसे यही कहा था कि - 'मेरे लिए बस इतना ही काफी है कि तू बस अपनी तबीयत का ध्यान रख।'

पिता के सपनों को पूरा करेंगे मल्हार

मल्हार ने यह भी कहा कि वह नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को कभी नहीं रुकने देंगे। नाना पाटेकर 'नाम' फाउंडेशन के जरिए जल संरक्षण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे थे और इस काम के लिए कई लोगों को जिम्मेदारियां सौंप रखी थीं। मल्हार ने कहा कि 'नाना साहेब का काम आगे बढ़ाया जाएगा।' मल्हार ने ये भी बताया कि मराठवाड़ा में प्रस्तावित काम को आगे बढ़ाने के लिए उनकी मुख्यमंत्री से भी बातचीत हुई है।

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