नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसके साथ ही फिल्म के किरदारों, कलाकारों और उनकी भूमिकाओं को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आ रहे हैं। वहीं, सनी देओल हनुमान और अरुण गोविल महाराज दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में कई ऐसे कलाकार भी हैं, जिनके किरदार कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक हैं अभिनेता अजिंक्य देओ, जिन्होंने महर्षि विश्वामित्र का किरदार निभाया है। दिलचस्प बात यह है कि अजिंक्य इस फिल्म में पहले दशरथ की भूमिका निभाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने ऑडिशन भी दिया था। हालांकि, आखिरकार उन्हें विश्वामित्र के किरदार के लिए चुना गया।
दशरथ बनने के लिए दिया था ऑडिशन, फिर मिला विश्वामित्र का रोल
अजिंक्य देओ ने मिड डे को दिए इंटरव्यू में बताया था कि करीब तीन साल पहले उन्होंने महाराज दशरथ की भूमिका के लिए ऑडिशन दिया था। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर फिल्म में उनकी भूमिका पूरी तरह बदल जाएगी। फिल्म की कास्टिंग प्रक्रिया आगे बढ़ी तो दिग्गज अभिनेता अरुण गोविल इस प्रोजेक्ट से जुड़ गए और उन्हें दशरथ का किरदार सौंपा गया। अरुण गोविल को रामानंद सागर की टीवी सीरीज ‘रामायण’ में भगवान राम के रूप में खूब लोकप्रियता मिली थी। ऐसे में इस बार उन्हें राम के पिता महाराज दशरथ के रूप में देखना भी दर्शकों के लिए खास रहा।
अजिंक्य ने बताया कि अरुण गोविल के फिल्म से जुड़ने के बाद उन्हें महर्षि विश्वामित्र की भूमिका ऑफर की गई। अभिनेता ने इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। उनके मुताबिक, वह ‘रामायण’ में विश्वामित्र के किरदार की गरिमा और महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए भले ही उन्हें दशरथ की भूमिका नहीं मिली, लेकिन इस महाकाव्य का हिस्सा बनने का अवसर उनके लिए बेहद खास था।
लुक टेस्ट के बाद विश्वामित्र के रूप में हुए फाइनल
अजिंक्य देओ ने अपने इंटरव्यू में यह भी बताया कि विश्वामित्र का किरदार स्वीकार करने के बाद उनके कई लुक टेस्ट हुए। इसके बाद कास्टिंग और लुक को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी। अभिनेता के अनुसार, जब उनका लुक तैयार हुआ और टीम ने उन्हें इस भूमिका में देखा तो सभी काफी खुश थे। उन्होंने इस मौके के लिए फिल्म के निर्माताओं का आभार जताया था। अजिंक्य ने इसे अपने करियर का बड़ा अवसर बताते हुए कहा था कि इतनी भव्य और महत्वपूर्ण फिल्म से जुड़ना उनके लिए शानदार अनुभव रहा।
फिल्म रिलीज होने के बाद अब विश्वामित्र का किरदार भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय है। रामकथा में महर्षि विश्वामित्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वही बालक राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन में ले जाते हैं और उन्हें कई महत्वपूर्ण अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान देते हैं। राम के जीवन में उनकी भूमिका केवल एक गुरु की नहीं, बल्कि उन्हें आगे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने वाले मार्गदर्शक की भी है। ऐसे में अजिंक्य देओ के लिए इस किरदार को पर्दे पर निभाना एक अहम जिम्मेदारी रही है।
कौन हैं अजिंक्य देओ? मराठी और हिंदी सिनेमा में बना चुके हैं पहचान
अजिंक्य देओ फिल्म और टेलीविजन जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वह मराठी और हिंदी मनोरंजन जगत में लंबे समय से सक्रिय हैं। अभिनेता ने अपने करियर में फिल्मों के साथ टीवी प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी पहचान बनाई है। वह दिग्गज मराठी अभिनेता रमेश देव और अभिनेत्री सीमा देव के बेटे हैं। अभिनय की विरासत से जुड़े अजिंक्य ने अपनी मेहनत और भूमिकाओं के जरिए इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई है। उन्होंने मराठी सिनेमा में कई फिल्मों में काम किया है और हिंदी फिल्मों में भी नजर आए हैं। उनकी फिल्मोग्राफी में ‘संसार’, ‘ईश्वर’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा वह ‘संविधान’ जैसे टेलीविजन प्रोजेक्ट का भी हिस्सा रहे हैं।
‘रामायण’ में विश्वामित्र के किरदार से जुड़ा खास महत्व
‘रामायण’ जैसी महागाथा का हिस्सा बनना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। अजिंक्य देओ के लिए भी यह सफर एक दिलचस्प मोड़ लेकर आया। जिस भूमिका के लिए उन्होंने शुरुआत में ऑडिशन दिया था, वह उन्हें नहीं मिली, लेकिन इसके बजाय उन्हें कहानी के एक बेहद अहम पात्र को निभाने का अवसर मिला। अरुण गोविल के दशरथ बनने के बाद विश्वामित्र के रूप में अजिंक्य की कास्टिंग इस फिल्म से जुड़ी दिलचस्प बातों में शामिल है। अब दर्शकों की नजर इस पर है कि अभिनेता ने महर्षि विश्वामित्र के किरदार को पर्दे पर किस अंदाज में जीवंत किया है।
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