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शमिताभ

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 Published : Apr 07, 2015 03:30 am IST,  Updated : Apr 07, 2015 03:30 am IST
Shamitabh
Shamitabh
  • फिल्म रिव्यू: Shamitabh
  • स्टार रेटिंग 3/5
  • पर्दे पर: 6 FEB, 2015
  • डायरेक्टर: आर बाल्की
  • शैली: ड्रामा

कहानी क्या है-

कहानी है दानिश (धनुष) की जिसे जुनून की हद तक  एक्टिंग का शौक़ है पर वो बोल नहीं सकता। उसपर नज़र पड़ती है असिस्टेंट डायरेक्टर अक्षरा (डेब्युटैंट अक्षरा हासन) की जो उसे ऐसी टेक्नॉलजी से मिलवाती है जिससे वो बोल सकता है लेकिन इसके लिए उसे जरूरत है किसी और की आवाज़ की। यहां एंट्री होती है अमिताभ सिन्हा (अमिताभ बच्चन) जो जिंदगी में हर तरफ से हार चुका है और अब शराब के नशे में धुत्त एक कब्रिस्तान में रहता है। काफी मनाने के बाद अमिताभ टेक्नॉलजी के जरिए दानिश की आवाज बनने के लिए तैयार हो जाता है।

दानिश फिल्म इंडस्ट्री के लिए अपना नाम शमिताभ रख लेता है और रातों रात सुपस्टार बन जाता है। आगे की कहानी अमिताभ सिन्हा और दानिश के अहंकार की लड़ाई के बारे में है। क्या वो दोनों एक-दूसरे को नपसंद करने के बावजूद साथ रह पाएंगे? जानने के लिए देखिए शमिताभ।

क्यों देखे इसे-

फिल्म का आइडिया कमाल का है और निर्देशक आर बाल्की ने काफी हद तक इस आइडिया को अच्छी तरह से पर्दे पर उतारा भी है। एक चिड़चि़डे़ शराबी और बेआवाज नौजवान के संबंध को बाल्की बहुत ही खूबी के साथ दिखाते है। जहां इनकी ईगो आपको हंसाने में कामयाब होती है वही बॉलीवुड की कुछ सच्चाईयों से आप रूबरू होते है। बाल्की ने फिल्मकारों पर भी कई जगह चुटकी ली है जो शायद आपको हंसाए। फिल्म की कहानी को कहने का तरीका और फिल्म के संवाद भी असरदार हैं। मनोरंजन के साथ-साथ फिल्म आपको अंत में सोचने पर भी मजबूर करती है।

कलाकारों का अभिनय फिल्म की जान है। अमिताभ बच्चन अपने लुक से लेकर अभिनय तक पर्दे पर बेहतरीन नज़र आते हैं। धनुष भी बिग बी से बहुत पीछे नहीं है और कई जगह उम्दा अभिनय करते हैं। पहली बार एक्टिंग कर रही अक्षरा हासन का अभिनय भी अच्छा है।

कमज़ोर कडी़-

फिल्म की स्क्रिप्ट इंटरवल के बाद तब अपना चार्म खोने लगती है जब बॉलीवुड के घिसे पिटे आइडियाज को दोहराया जाने लगता है। अमिताभ बच्चन के खूब सारे शराबी सीन्स आपको एक समय के बाद बोर करने लगते है। फिल्म का ‘विहस्की और पानी’ वाला डायलॉग्स हद से ज्यादा इस्तेमाल किए गया हैं।

अंत तक आते-आते फिल्म की राइटिंग बहुत ही सरल हो जाती है।

आखिरी राय-

इन खामियों के बावजूद फिल्म में मनोरंजन है और यही एक दर्शक चाहता है।

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