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‘छोटे-से देश सिंगापुर को भी अंतरिक्ष तक साथ ले गए’, विक्रम-1 की सफलता पर बोले हाई कमिश्नर वोंग

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 18, 2026 02:39 pm IST,  Updated : Jul 18, 2026 02:39 pm IST

स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग पर सिंगापुर के हाई कमिश्नर साइमन वोंग ने भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने सिंगापुर को भी अंतरिक्ष यात्रा में साथ आगे बढ़ाया है। विक्रम-1 की सफलता ने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नई मजबूती दी है।

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सिंगापुर के हाई कमिश्नर साइमन वोंग ने विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग पर भावुक संदेश लिखा है। Image Source : X.COM/SGININDIA

Highlights

  • सिंगापुर हाई कमिश्नर ने स्काईरूट के विक्रम-1 लॉन्च को ऐतिहासिक बताया।
  • भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी ने पहली कोशिश में रॉकेट को कक्षा में पहुंचाया।
  • 'मिशन आगमन' से भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता वाले देशों में शामिल हुआ।

नई दिल्ली: भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि पर सिंगापुर के हाई कमिश्नर साइमन वोंग ने भावुक प्रतिक्रिया दी है। स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट के सफल प्रक्षेपण पर उन्होंने कहा कि भारत ने 'एक छोटे-से देश सिंगापुर को भी अपने साथ अंतरिक्ष और उससे आगे तक पहुंचाया है।' उन्होंने इस उपलब्धि के लिए इसरो, इन-स्पेस और स्काईरूट की टीम को धन्यवाद दिया। बता दें कि भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले कक्षीय रॉकेट 'विक्रम-1' ने शनिवार को कई तकनीकी पेलोड को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाकर इतिहास रच दिया।

'धन्यवाद इसरो, इन-स्पेस और स्काईरूट'

सिंगापुर हाई कमिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हाई कमिश्नर वोंग का संदेश साझा करते हुए लिखा, 'वंदे मातरम! इतिहास बन गया। स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 कक्षा में पहुंच गया है।' वोंग ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा,

'धन्यवाद इसरो, इन-स्पेस और स्काईरूट। एक छोटे देश सिंगापुर को अपने साथ अंतरिक्ष और उससे आगे तक ले जाने के लिए आपका आभार। इस समय मैं बहुत भावुक हूं।'

वोंग ने विक्रम-1 की सफलता के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक नागा भरत डाका से भी बातचीत की और पूरी टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी।

पहली ही कोशिश में सफल हुआ विक्रम-1

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से शनिवार को स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने विक्रम-1 रॉकेट का पहला ऑर्बिटल मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया। इस मिशन को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया था। इसके साथ ही भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी ने खुद से ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट बनाने और लॉन्च करने वाली दुनिया की चुनिंदा व्यावसायिक कंपनियों में जगह बना ली। लॉन्च से पहले तकनीकी कारणों से थोड़ी देर के लिए रुकावट आई, लेकिन बाद में उड़ान पूरी तरह सफल रही। 7 मंजिला इमारत जितने ऊंचे इस मल्टी-स्टेज रॉकेट ने सभी 4 चरणों में शानदार प्रदर्शन किया और पहली ही उड़ान में अपने सैटेलाइट पेलोड को तय कक्षा में स्थापित कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी बधाई

मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की टीम से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने पहली ही कोशिश में मिली इस बड़ी सफलता को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पीएम मोदी ने 'विक्रम-1' के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत के आत्मनिर्भरता अभियान की सफलता का प्रमाण है। मोदी ने स्काईरूट की टीम को अपनी 'हार्दिक शुभकामनाएं' देते हुए कहा कि उनका आज का 'मिशन आगमन' आगे भी इसी तरह सफलता के साथ आगे बढ़ता रहे।

कार्बन-कंपोजिट से बना है विक्रम-1

विक्रम-1 रॉकेट पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट सामग्री से तैयार किया गया है। यह रॉकेट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने की क्षमता रखता है। इसमें स्काईरूट द्वारा विकसित अत्याधुनिक प्रणोदन प्रणाली (प्रोपल्शन सिस्टम) का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें हाई-परफॉर्मेंस सॉलिड मोटर और 3डी प्रिंटेड इंजन शामिल हैं। इस पहली उड़ान में कई तकनीकी प्रयोग भी भेजे गए। इनमें ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व और डी-क्यूब्ड के टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर के साथ स्काईरूट का अपना स्कोप प्रयोग भी शामिल था।

रॉकेट के साथ भेजे गए खास संदेश

विक्रम-1 अपने साथ कुछ खास यादगार चीजें भी लेकर गया। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से लिखा 'वंदे मातरम' संदेश वाला पोस्टकार्ड शामिल था। इसके अलावा इसरो के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, कंपनी कर्मचारियों, निवेशकों और दुनिया भर के समर्थकों के लिखे संदेश भी रॉकेट के साथ भेजे गए।

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को मिली बड़ी मजबूती

विक्रम-1 की सफलता भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण की बड़ी पुष्टि मानी जा रही है। सरकार की नीतियों के बाद अब निजी कंपनियां ISRO के साथ मिलकर सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल बनाने में आगे बढ़ रही हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना साल 2018 में ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। कंपनी का लक्ष्य अंतरिक्ष तक पहुंच को सस्ता और आसान बनाना है।

पहले भी इतिहास बना चुका है स्काईरूट का रॉकेट

बता दें कि इससे पहले 2022 में स्काईरूट के विक्रम-एस रॉकेट ने भारत के पहले निजी तौर पर निर्मित रॉकेट के रूप में अंतरिक्ष तक पहुंचकर इतिहास बनाया था। अब विक्रम-1 की सफल उड़ान से मिले टेलीमेट्री आंकड़े कंपनी को अपने विक्रम रॉकेट परिवार को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इसके आधार पर स्काईरूट भविष्य में नियमित व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

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