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Explainer: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से आपकी जेब, रसोई गैस और पेट्रोल पर क्या होगा असर?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 18, 2026 11:47 am IST,  Updated : Jun 18, 2026 12:24 pm IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगर पूरी तरह सामान्य रूप से खुला रहता है और ईरान-अमेरिका के बीच शांति बनी रहती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है। इसका असर आम आदमी की जेब, पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, हवाई किराए और रोजमर्रा की महंगाई तक दिखाई दे सकता है।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलते ही आम आदमी को मिल सकती है बड़ी राहत! Image Source : CANVA

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द पूरी तरह खुल जाएगा। इससे न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी मिली है, बल्कि भारतीय बाजार और भारत के आम आदमी के लिए भी यह एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह सामान्य रूप से खुला रहता है और ईरान-अमेरिका के बीच शांति बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों या सरकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी की जेब, पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, हवाई किराए और रोजमर्रा की महंगाई तक दिखाई दे सकता है।

क्यों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कहते हैं दुनिया की ऑयल लाइफलाइन?

भौगोलिक दृष्टि से देखें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह जलमार्ग पर्शियन गल्फ को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर के आसपास है, लेकिन इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, कुवैत, ईरान और कतर जैसे दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देश इसी रास्ते के जरिए अपने जहाजों को वैश्विक बाजारों में भेजते हैं। यही वजह है कि जब भी इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। अब इस रास्ते के पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खुलने से वैश्विक तेल बाजारों ने राहत की सांस ली है।

ऊर्जा के लिए विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता

भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत से भी ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और आयातक देश है। आपक बता दें कि भारत जो कुल तेल आयात करता है, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 60 से 65 प्रतिशत) खाड़ी देशों से आता है। सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि भारत अपनी घरेलू रसोई गैस (LPG) की कुल खपत का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इस आयात का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत के पश्चिमी बंदरगाहों तक पहुंचता है। जब इस रूट पर तनाव था, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को तेल की डिलीवरी मिलने में देरी होती थी। साथ ही, समुद्री जहाजों को युद्ध क्षेत्र से गुजरने के लिए भारी-भरकम वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम देना पड़ता था, जिससे भारत का आयात बिल बहुत ज्यादा बढ़ जाता था। रास्ता पूरी तरह साफ होने से अब यह अतिरिक्त खर्च कम हो जाएगा।

विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता
Image Source : CANVAविदेशी तेल पर भारत की निर्भरता

क्या सस्ता होगा LPG सिलेंडर?

भारत के मध्यम और निम्नवर्गीय परिवारों के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा रसोई गैस पर खर्च होता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के सुचारू रूप से काम करने का सीधा फायदा देश के 30 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सामान्य होती है, तो वैश्विक स्तर पर एलपीजी की इनपुट कॉस्ट (लागत) में भारी गिरावट आती है। सप्लाई चेन की रुकावटें दूर होने से भारत में बिना किसी देरी के समय पर रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) की लॉजिस्टिक लागत घटने से आने वाले समय में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दामों में स्थिरता आ सकती है, जिससे सीधे तौर पर आपकी रसोई का मासिक बजट सुधर जाएगा।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटेंगी?

जैसे ही अमेरिका-ईरान शांति समझौते का ऐलान हुआ, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट का रुख देखा जा रहा है। भारत के संदर्भ में, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर की गिरावट आने से देश के आयात बिल में हजारों करोड़ रुपये की बचत होती है। जब तेल कंपनियों को सस्ता कच्चा तेल मिलेगा, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लगाम लग सकती हैं। ऐस हुआ तो, रोजाना टू-व्हीलर या कार से दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोगों का मंथली फ्यूल बजट कम होगा। इसके अलावा, डीजल सस्ता होने का एक दूरगामी फायदा यह होता है कि देश में मालभाड़ा कम हो जाता है। जब ट्रकों का किराया घटेगा, तो खेतों से शहरों तक आने वाली सब्जियां, फल, अनाज और रोजमर्रा की अन्य एफएमसीजी (FMCG) वस्तुएं भी सस्ती होंगी, जिससे आम आदमी को चौतरफा महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

मैक्रो-इकनॉमिक स्तर पर देखा जाए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना भारत के व्यापार घाटे को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा केवल तेल खरीदने में खर्च हो जाता है। कच्चे तेल के दाम स्थिर और कम होने से देश का राजकोषीय घाटा कंट्रोल में रहेगा और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होगा।

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