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N Chandrasekaran के बाद कौन होगा टाटा ग्रुप का नया बॉस? TV Narendran पर टिकीं सबकी नजरें! जानिए कौन हैं ये दिग्गज

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Aug 13, 2026 12:58 pm IST,  Updated : Aug 13, 2026 12:58 pm IST

टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन को लेकर कॉरपोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है। मौजूदा चेयरमैन N Chandrasekaran फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद संभालने की इच्छा नहीं रखते। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की कमान आखिर किसके हाथ आएगी?

चंद्रशेखरन के बाद...- India TV Hindi
चंद्रशेखरन के बाद टीवी नरेंद्रन का नाम सुर्खियों में! Image Source : ANI/CANVA

भारत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में से एक टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने संकेत दिया है कि फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वह चेयरमैन के तौर पर नया कार्यकाल नहीं लेंगे। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ में जाएगी? इसी बीच टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन (TV Narendran) का नाम कारोबारी गलियारों में चर्चा में आया है। हालांकि, अभी उनके नाम पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है और उत्तराधिकारी को लेकर फैसला होना बाकी है।

टाटा ग्रुप में क्यों शुरू हुई उत्तराधिकारी की तलाश?

चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा ग्रुप के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। टाटा सन्स में नेतृत्व का फैसला केवल किसी एक व्यक्ति की पसंद से नहीं होता। टाटा ट्रस्ट की टाटा सन्स में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है, इसलिए चेयरमैन के चयन में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। टाटा ग्रुप की कंपनियों और ट्रस्ट से जुड़े हितधारकों के बीच गवर्नेंस और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा के बीच अगला चेयरमैन चुनना एक महत्वपूर्ण फैसला होगा।

टीवी​ नरेंद्रन का नाम क्यों चर्चा में आया?

टीवी नरेंद्रन टाटा ग्रुप के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने दशकों तक समूह के भीतर काम किया है। वह फिलहाल टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका लंबा टाटा एक्सपीरिएंस और बड़े कारोबार को संभालने का अनुभव माना जाता है। नरेंद्रन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई एनआईटी त्रिची से की और इसके बाद IIM कलकत्ता से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। वह 1988 में टाटा स्टील के जरिए टाटा ग्रुप से जुड़े थे। यानी टाटा परिवार के साथ उनका करीब चार दशक पुराना रिश्ता है।

करीब 4 दशक का टाटा एक्सपीरिएंस

टाटा स्टील में अपने लंबे करियर के दौरान नरेंद्रन ने सेल्स, मार्केटिंग, इंटरनेशनल बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनके करियर का एक बड़ा हिस्सा थाईलैंड में भी बीता, जहां उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में टाटा स्टील के कारोबार को मजबूत करने में भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने भारत में टाटा स्टील के कारोबार की जिम्मेदारी संभाली और 2013 में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बने। यही लंबा अनुभव उन्हें टाटा ग्रुप के संभावित चेयरमैन की चर्चा में एक महत्वपूर्ण नाम बनाता है।

टाटा स्टील को मुश्किल दौर से निकाला

नरेंद्रन के नेतृत्व में टाटा स्टील ने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। जब उन्होंने कंपनी की कमान संभाली, तब स्टील इंडस्ट्री में उतार-चढ़ाव, कंपनी पर कर्ज और अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहणों से जुड़ी चुनौतियां मौजूद थीं। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कर्ज कम करने, कैश फ्लो बेहतर करने और वैल्यू-एडेड स्टील उत्पादों पर फोकस बढ़ाने की दिशा में काम किया। यूरोप में टाटा स्टील के कारोबार से जुड़ी चुनौतियों को भी कंपनी ने उनके कार्यकाल में संभाला। यही वजह है कि नरेंद्रन को बड़े और जटिल औद्योगिक कारोबार को संभालने वाला अनुभवी अधिकारी माना जाता है।

टाटा चेयरमैन का काम सिर्फ कंपनी चलाना नहीं

टाटा सन्स का चेयरमैन किसी एक कंपनी का CEO नहीं होता। टाटा ग्रुप में ऑटोमोबाइल, IT, स्टील, एयरलाइन, रिटेल, पावर, इलेक्ट्रॉनिक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई अलग-अलग कारोबार हैं। ऐसे में चेयरमैन की भूमिका रणनीति बनाने, पूंजी आवंटन, निवेश के फैसले और पूरे समूह के संस्थागत नेतृत्व से जुड़ी होती है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों की समझ और बड़े कारोबारी फैसले लेने की क्षमता जरूरी होती है। TV नरेंद्रन का अनुभव इस लिहाज से महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों, मैन्युफैक्चरिंग, श्रम संबंधों और रेगुलेटरी चुनौतियों को करीब से देखा है।

टाटा की संस्कृति को समझना भी बड़ी ताकत

टाटा ग्रुप के लिए सिर्फ कारोबारी प्रदर्शन ही महत्वपूर्ण नहीं है। समूह की अपनी एक अलग संस्थागत संस्कृति और गवर्नेंस व्यवस्था है। इसलिए चेयरमैन के लिए टाटा ग्रुप की कार्यशैली और मूल्यों की समझ भी अहम मानी जाती है। नरेंद्रन लंबे समय से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं। ऐसे में उन्हें समूह की संस्कृति, कंपनियों और आंतरिक कामकाज की अच्छी समझ है। यही कारण है कि उनका नाम संभावित उत्तराधिकारी की चर्चाओं में सामने आया है। चंद्रशेखरन भी टाटा ग्रुप के लंबे समय से अंदरूनी व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने TCS में लंबा करियर बनाने के बाद 2017 में टाटा सन्स की कमान संभाली थी। ऐसे में नरेंद्रन का प्रोफाइल भी समूह में निरंतरता की सोच के अनुरूप दिखाई देता है।

लेकिन क्या टीवी नरेंद्रन ही बनेंगे अगले चेयरमैन?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। टाटा सन्स ने अगले चेयरमैन के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। नरेंद्रन का नाम फिलहाल कारोबारी हलकों में चर्चा में आए संभावित नामों में से एक है। उत्तराधिकार की दौड़ में अन्य नामों की भी चर्चा हो रही है। इसलिए केवल नरेंद्रन के नाम को पक्का उम्मीदवार मानना सही नहीं होगा। इसके अलावा अगले चेयरमैन के सामने उम्र और कार्यकाल से जुड़े पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। टाटा ग्रुप को ऐसा नेतृत्व चाहिए होगा जो लंबे समय तक समूह की रणनीति को आगे बढ़ा सके।

नए चेयरमैन के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन के सामने कई बड़े काम होंगे। समूह एयर इंडिया के टर्नअराउंड, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए कारोबारों में निवेश, टाटा कैपिटल की रणनीति और टीसीएस की ग्रोथ से जुड़ी चुनौतियों पर काम कर रहा है। ऐसे में अगले चेयरमैन को एक तरफ नए कारोबारों में बड़े निवेश को संभालना होगा, तो दूसरी तरफ समूह की अलग-अलग कंपनियों के बीच पूंजी का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित करना होगा।

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