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सऊदी अरब में बांग्लादेशी युवक-युवती को चुपके से क्यों दी गई फांसी? दोनों ने ऐसा किया क्या था

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Oct 21, 2026 10:24 am IST,  Updated : Oct 21, 2026 10:47 am IST

सऊदी अरब में एक बांग्लादेशी युवक और युवती को चुपके से फांसी की सजा दे दी गई। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पवित्र मक्का मस्जिद में एक दूसरे को चूमा था। इस सजा को लेकर बांग्लादेश में विवाद बढ़ गया है।

सऊदी अरब में फांसी की सजा- India TV Hindi
सऊदी अरब में फांसी की सजा

Highlights

  • बांग्लादेशी कपल को सऊदी अरब में फांसी
  • चुपके से क्यों दी गई फांसी?
  • दोनों का क्या था अपराध?

सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद में अनैतिक कार्य करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों, एक युवक और युवती को 14 अक्टूबर के दिन चुपचाप फांसी दे दी गई। दोनों को इस तरह से फांसी दिए जाने पर बांग्लादेश में भारी आक्रोश है। फांसी की सजा क्यों दी गई, दोनों के अपराध क्या थे, फांसी की पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी, क्या उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिला, और क्या ढाका को पहले से सूचित किया गया था ताकि वे इन लोगों की जान बचाने में कोई मदद कर पाते? अब इस तरह के सवालों से बवाल मचा हुआ है। सऊदी मीडिया की रिपोर्टों में यह नहीं बताया गया है कि वे "अनैतिक कार्य" क्या थे, जिसके लिए उन्हें फांसी दी गई है।

ताजीर के तहत दी गई फांसी की सजा

हालांकि कहा गया है कि, इन दोनों बांग्लादेशियों को 'ताज़ीर' के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई थी। खबरों के अनुसार, संबंधित न्यायिक अधिकारियों ने उनकी सज़ा को बरकरार रखा, जिसके बाद एक शाही आदेश जारी कर मक्का क्षेत्र में उन्हें फांसी देने की अनुमति दे दी गई। ये बात सामने नहीं आई है कि दोनों ने आखिर ऐसा क्या किया था, जिसकी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई। शुरुआत में इसे एक कथित "अनैतिक कृत्य" बताया गया और ऐसी खबरें आईं कि वे मस्जिद के अंदर एक-दूसरे को चूम रहे थे, जबकि बाद में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि यह केवल माथे पर किया गया एक चुंबन था।

कौन थे दोनों बांग्लादेशी नागरिक?
सऊदी अरब के मीडिया ने गृह मंत्रालय के हवाले से बताया है कि इन दो लोगों के नाम नज़रुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिती अख्तर थे। उन पर पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद के अंदर "अनैतिक कृत्य" करने का आरोप था। रियाद ने बस इतनी ही जानकारी दी है। सऊदी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि वे कथित कृत्य क्या थे, उन्हें कब गिरफ्तार किया गया था, या उन पर मुकदमा कैसे चलाया गया।

सऊदी अरब में बांग्लादेशी युवक-युवती को फांसी
Image Source : INDIATVसऊदी अरब में बांग्लादेशी युवक-युवती को फांसी

नजरुल के परिवार ने क्या बताया?
फांसी की सजा पाए नज़रुल, चट्टोग्राम डिवीजन के ब्राह्मणबरिया के रहने वाले थे। वह नवंबर 2022 में सऊदी अरब चले गए और मक्का की मस्जिद अल-हरम में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे। उनके परिवार ने 'प्रोथोम आलो' को बताया कि आठ महीने बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और फांसी दिए जाने तक वह जेल में ही रहे। परिवार ने बताया कि उनको एक फोन आया जिसमें उन्हें नज़रूल को फांसी दिए जाने की जानकारी दी गई। यह खबर सुनकर उनकी 65 वर्षीय चाची, आबेदा बेगम बेहोश हो गईं और बाद में उनकी मौत हो गई।

नज़रुल के पिता, अब्दुल बशीर, जो खुद 24 साल तक सऊदी अरब में काम कर चुके हैं, ने 'द डेली स्टार' को बताया कि उनके बेटे को निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "अगर मेरे बेटे को बिना किसी ठोस वजह के फांसी दी गई है, तो मुझे न्याय चाहिए।" 

नजरुल के साथ सीती को क्यों दी गई मौत की सजा?
सऊदी अरब में नजरुल के साथ जिस बांग्लादेशी महिला को मौत की सजा दी गई, उसका नाम सीती अख्तर बताया जा रहा है। सीती अख्तर के नज़रुल के साथ संबंधों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी है। नज़रुल के पिता, अब्दुल बशीर ने इस बात से इनकार किया कि सीती, नज़रुल की पत्नी थी। उन्होंने कहा, "हम तो उसे जानते भी नहीं हैं। मैंने सुना है कि वे दोनों एक ही जगह काम करते थे।" हालांकि, परिवार के एक सदस्य ने, जिसने अपनी पहचान उजागर नहीं की, बीबीसी बांग्ला को बताया कि नज़रुल ने एक बार स्वीकार किया था कि उसका सीती के साथ "अफेयर" था।

सऊदी अरब का सख्त कानून
बता दें कि सऊदी अरब दुनिया में मौत की सजा देने वाले सबसे प्रमुख देशों में से एक है। 'ह्यूमन राइट्स वॉच' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कम से कम 356 लोगों को मौत की सजा दी गई, जिनमें से ज़्यादातर मामले नशीले पदार्थों से जुड़े थे, जिनमें कोई हिंसा शामिल नहीं थी। यह तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2022 के एक इंटरव्यू में कहा था कि मौत की सज़ा को अब केवल हत्या के मामलों तक सीमित कर दिया गया है।

इन अपराधों में मिलती है मौत की सजा
सऊदी अरब इस्लामी कानून की तीन मुख्य श्रेणियों के तहत मौत की सज़ा देता है, जिसमें पहला है क़िसास यानी बदले की सज़ा, मुख्य रूप से हत्या के मामलों में, दूसरा है हुदूद, जिसमें कुछ खास अपराधों के लिए तय की गई सज़ाएं होती हैं और तीसरा है ताज़ीर यानी न्यायाधीश के विवेक पर दी जाने वाली सज़ाएं, जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अपराध शामिल हैं।

बांग्लादेशी जोड़े को मौत की सजा दिए जाने पर भारी आक्रोश
सऊदी अरब में इन दोनों बांग्लादेशियों को मौत की सजा दिए जाने से बांग्लादेश और दुनिया के अन्य हिस्सों में भारी आक्रोश है। लोग इस पूरी प्रक्रिया के पारदर्शी न होने पर सवाल उठा रहे हैं। लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि सिर्फ माथे पर चूमने जैसी मामूली बात के लिए सऊदी अरब में इन बांग्लादेशियों को मौत की सजा दी जा सकती है। लोगों में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि यह सजा चुपचाप क्यों दी गई और इस बारे में किसी तरह की कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई।

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