Saturday, May 18, 2024
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Explainer: मालदीव में संसदीय चुनाव आज, भारत विरोधी रुख और भ्रष्टाचार के आरोप में घिरने के बाद क्या होगा मुइज्जू का भविष्य?

मालदीव में आज संसदीय चुनाव हो रहे हैं। भारत और मालदीव के बीच चल रहे तनाव के बीच इन चुनावों के परिणाम काफी मायने रखने वाले हैं। इस चुनाव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की चीन की ओर झुकाव वाली रणनीति और भारत विरोधी रुख की भी असली परीक्षा है। वह भी ऐसे वक्त में जब मुइज्जू भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं।

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Updated on: April 21, 2024 13:55 IST
मो. मुइज्जू, मालदीव के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
Image Source : AP मो. मुइज्जू, मालदीव के राष्ट्रपति।

माले: भारत से चल रहे तनाव के बीच आज मालदीव में संसदीय चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में भारत विरोधी रुख रखने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के शासन की कड़ी परीक्षा भी है। खासकर तब जब वह भारत विरोधी एजेंडे के साथ हाल ही में भ्रष्टाचार के एक मामले में रिपोर्ट लीक होने से घिर गए हैं। विपक्ष उनपर महाभियोग चलाने की मांग कर रहा है। ऐसे में संसदीय चुनाव के परिणाम भारत के लिए भी बेहद मायने रखने वाले हैं। इसलिए भारत की भी मालदीव के संसदीय चुनाव परिणामों पर नजर बनी है। 

भारत-मालदीव में तनाव के बीच ये चुनाव राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत विरोधी नीति का परीक्षण करेंगे। 45 वर्षीय राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पिछले सितंबर में चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति चुनाव जीता था। वह चुनाव से पहले ही भारत आउट का नारा दे रहे थे। मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत-मालदीव के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हालांकि अभी इस महीने से मुइज्जू के रुख में भारत के प्रति काफी नरमी देखने को मिली और उन्होंने भारत से आर्थिक मदद भी मांगी। मगर अब भी भारत और मालदीव के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। हालांकि भारत के सहयोग से मालदीव में कई विकास कार्य अब भी कराए जा रहे हैं।

मुइज्जू के चीन प्रेम की भी परीक्षा

मालदीव में आज हो रहे संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के चीन की ओर झुकाव और लक्जरी पर्यटन हॉटस्पॉट के पारंपरिक संरक्षक भारत से दूर होने की परीक्षा होने की संभावना है। मुख्य रूप से प्राचीन सफेद समुद्र तटों और एकांत रिसॉर्ट्स के साथ दक्षिण एशिया में सबसे महंगे अवकाश स्थलों में से एक के रूप में जाना जाने वाला रणनीतिक हिंद महासागर द्वीप राष्ट्र एक भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट भी बन गया है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के प्रतिनिधि के रूप में पिछले सितंबर के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी। 

चीनी कंपनियों को दिए बेहिसाब ठेके

इस सप्ताह एक अदालत द्वारा भ्रष्टाचार के लिए उनकी 11 साल की जेल की सजा को रद्द करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। फिर इस महीने, उन्होंने चीनी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों को हाई-प्रोफाइल बुनियादी ढांचे के ठेके दिए, क्योंकि संसदीय चुनावों के लिए प्रचार जोरों पर था। उनका प्रशासन 89 भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी को घर भेजने की प्रक्रिया में भी है जो द्वीपसमूह की विशाल समुद्री सीमाओं पर गश्त करने के लिए नई दिल्ली द्वारा उपहार में दिए गए टोही विमानों का संचालन करते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के भारत से रहे अच्छे संबंध

मुइज्जू के पूर्ववर्ती राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के रिश्ते भारत के साथ अच्छे रहे थे। मुइज्जू के एक वरिष्ठ सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर एएफपी को बताया, "रविवार के चुनाव में पार्टियां वोटों के लिए प्रचार कर रही हैं, इसलिए भू-राजनीति पृष्ठभूमि में है।" "वह भारतीय सैनिकों को वापस भेजने के वादे पर सत्ता में आए थे और वह इस पर काम कर रहे हैं। सत्ता में आने के बाद से संसद उनके साथ सहयोग नहीं कर रही है।" मुइज्जू के कार्यालय में आने के बाद से सांसदों ने उनके तीन नामितों को कैबिनेट में शामिल करने से रोक दिया है और उनके कुछ खर्च प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है। मुइज्जू की पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) सहित सभी मुख्य राजनीतिक दलों में विभाजन से किसी एक पार्टी के लिए बहुमत हासिल करना कठिन लग रहा है। ऐसे में भारत समर्थक इब्राहिम सोलिह की पार्टी की जीत तय मानी जा रही है। ऐसे हुआ तो मुइज्जू की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं यह भारत के लिए अच्छा होगा। 

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