संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE का OPEC से बाहर निकलने का निर्णय, दुनिया की तेल की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। OPEC, जो विश्व के करीब 40 प्रतिशत कच्चे तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है, लंबे वक्त से उत्पादन कोटा तय कर उसके दाम को प्रभावित करता रहा है। लेकिन UAE को पिछले कुछ साल से यह शिकायत है कि OPEC का कोटा बहुत लिमिटेड है, जिससे वह अपनी पूरी प्रोडक्शन कैपिसिटी के हिसाब से मार्केट में तेल नहीं बेच पा रहा है। दरअसल, UAE ने पिछले कुछ वर्षों में अपने Oil Production इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी इन्वेस्टमेंट किया है और अब वह ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर ग्लोबल मार्केट में अपनी भागीदारी को बढ़ाना चाहता है।
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OPEC से क्यों अलग हो रहा UAE?
फिलहाल, UAE करीब 3.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन Oil का प्रोडक्शन करता रहा है, जबकि उसका सामर्थ्य लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने का माना जाता है। ऐसे में OPEC के नियम UAE के तेल उत्पादन को बढ़ाने में बाधा बन रहे थे। यही कारण है कि UAE ने न केवल OPEC बल्कि OPEC+ जिसमें रूस भी शामिल है, से भी अलग हो जाने का निर्णय किया है। यूएई सरकार के मुताबिक, यह स्टेप उसकी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। उसने यह कदम एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में उठाया है।
OPEC में कौन देश कितने तेल का करता है प्रोडक्शन
| देश का नाम | तेल उत्पादन का कोटा (प्रतिदिन बैरल) |
| Saudi Arabia | 11.19M |
| Iran | 4.71M |
| UAE | 4.6M |
| Iraq | 4.47M |
| Kuwait | 2.78M |
| Nigeria | 1.68M |
| Algeria | 1.4M |
| Libya | 1.38M |
| Venezuela | 1.01M |
| Rep. of Congo | 249.03K |
| Gabon | 239.01K |
| Equatorial Guinea | 84.39K |
सोर्स: यूएस एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन, OPEC
तेल बाजार पर तुरंत असर के आसार नहीं
हालांकि, UAE के इस निर्णय का तुरंत ग्लोबल मार्केट पर बड़ा प्रभाव देखने को शायद ही मिले। इसका एक बड़ा कारण ईरान से जुड़े युद्ध की वजह से सप्लाई पर पहले से ही पड़ रहे प्रेशर है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित है। इस वजह से तेल के दाम पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। साथ ही, अमेरिका जैसे देश भी बड़े लेवल पर ऑयल प्रोडक्शन कर रहे हैं, जिसके कारण OPEC की पकड़ अब पहले जैसी मजबूत नहीं मानी जा रही है।
सऊदी अरब से खटपट भी है बड़ी वजह
यूएई के इस निर्णय के पीछे क्षेत्रीय राजनीति भी मानी जा रही है। खासतौर पर सऊदी अरब के साथ UAE के संबंध पिछले कुछ साल में अलग-अलग कई मुद्दों पर तनाव भरे रहे हैं। दोनों ही देश रणनीतिक और आर्थिक मामलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जिससे OPEC की एकजुटता में कमी आई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि UAE अब सीधे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं के साथ समझौते करना चाहता है।
OPEC की पकड़ हो सकती है कमजोर
कुल मिलाकर, यूएई का OPEC संगठन से बाहर निकल जाना यह इशारा करता है कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी और कम नियंत्रित होती जा रही है। इसकी वजह से आगे चलकर तेल के दाम में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार पर OPEC की पकड़ और भी कमजोर पड़ने की संभावना है।