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क्या है V2X टेक्नोलॉजी? TRAI की इस तैयारी से सड़क दुर्घटनाओं पर लगेगी ब्रेक, गाड़ियां आपस में करेगी बात

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Jul 24, 2026 01:53 pm IST,  Updated : Jul 24, 2026 02:58 pm IST

अब टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत में रोड एक्सीडेंट्स पर लगाम लगाने की तैयारी चल रही है। दूरसंचार नियामक ने हाल ही में इस टेक्नोलॉजी से जुड़े कसंल्टेशन पेपर पर ओपन चर्चा की है।

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वी-टू-एक्स टेक्नोलॉजी Image Source : UNSPLASH

Highlights

  • V2X टेक्नोलॉजी के जरिए गाड़ियां आपस में कम्युनिकेट कर पाएंगी।
  • TRAI ने इस टेक्नोलॉजी को लेकर कसंल्टेशन पेपर पर ओपन चर्चा की है।
  • इस टेक्नोलॉजी की वजह भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लग सकती है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 4.8 लाख रोड एक्सीडेंट होते हैं, जिनमें 1.7 लाख लोगों की मौत होती है और 4.6 लाख से ज्यादा लोग इसमें घायल होते हैं। भारत में होने वाले रोड ज्यादातर सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह ओवरस्पीडिंग और रैश ड्राइविंग है। भारत में होने वाले रोड एक्सीडेंट्स और पब्लिक सेफ्टी को देखते हुए दूरसंचार नियामक TRAI एक खास V2X टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। इसके लिए कंसल्टेशन पेपर जारी कर दिया गया है और स्टेक होल्डर्स के बीच हाल ही में ओपन चर्चा हुई है।

क्या है V2X टेक्नोलॉजी?

यह एक खास टेक्नोलॉजी है, जिसकी मदद से दो गाड़ियां आपस में कम्युनिकेट कर सकती हैं। इस टेक्नोलॉजी का मकसद गाड़ियों के बीच कम्युनिकेशन स्थापित करना है ताकि रोड एक्सीडेंट्स को रोकने में मदद मिल सके। TRAI ने बताया कि V2X एक ऐसी तकनीक है जो गाड़ियों को अपने आसपास की हर जरूरी चीज से जोड़ती है। जैसे कि-

  • गाड़ी से गाड़ी (V2V)
  • गाड़ी से ट्रैफिक सिग्नल (V2I)
  • गाड़ी से पैदल यात्री (V2P)
  • गाड़ी से मोबाइल नेटवर्क (V2N)

यही कारण है कि इसे V2X यानी Vehicle to Everything टेक्नोलॉजी का नाम दिया गया है। इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से रियल टाइम की जानकारी मिलेगी ताकि सफर को सुरक्षित बनाया जा सके।

V2X Technology
Image Source : UNSPLASHवी-टू-एक्स टेक्नोलॉजी

वीकल-टू-वीकल (V2V) कम्युनिकेशन में दो गाड़ियां आपस में कम्युनिकेट करने के लिए शॉर्ट रेंज रेडियो फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करेगी। यह दोनों गाड़ियों के आसपास होने के बाद ही संभव हो पाएगा।

वीकल-टू-इंफ्रास्ट्रक्चर (V2I) में गाड़ियां सड़क के बगल में लगे इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि ट्रैफिक सिग्नल, ब्रेकर, साइन बोर्ड आदि के साथ कम्युनिकेट कर पाएंगी।

वीकल-टू-पेडेस्ट्रियन (V2P) में गाड़ियां सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों के साथ कम्युनिकेट कर पाएंगी। जैसे ही गाड़ियों को यह आभास होगा कि कोई पैदल यात्री आगे सड़क पार कर रहा है, अपने आप ब्रेक लग जाएगा ताकि संभावित टक्कर से बचा जा सके।

वीकल-टू-नेटवर्क (V2N) में गाड़ियां सड़क के आसपास लगे मोबाइल टावर से कम्युनिकेट कर पाएंगी। किसी भी आपात स्थिति में इसकी मदद से अलर्ट भेजा जा सकेगा। यही नहीं, गाड़ियां मैप अपडेट, फ्लीट बेस्ड डेटा कलेक्शन और ऑटोमोटिक क्लाउड सर्विसेज भी एक्सेस कर पाएंगी।

V2X कैसे करता है काम?

इस टेक्नोलॉजी को वीकल कम्युनिकेशन एक्सचेंज के तौर पर डेवलप किया गया है, जिसमें गाड़ी सड़क पर चल रहे अन्य गाड़ी से कम्युनिकेट करेगी। इसे V2V यानी वीकल टू वीकल कहा जाता है। इसी तरह वीकल टू इंफ्रास्ट्रक्चर V2I, वीकल टू पेडस्ट्रियन V2P और वीकल टू डिवाइस V2D जैसे कम्युनिकेशन चैनल स्थापित होंगे।

गाड़ी में मौजूद अलग-अलग वायरलेस कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल्स जैसे कि सेलुलर, WiFi, शॉर्ट रेंज रेडियो फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करके गाड़ियां आपस में कम्युनिकेट करेंगी। फिलहाल V2X टेक्नोलॉजी को कुछ देशों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में यूज किया जाता है। इसे एक चार्जिंग टेक्नोलॉजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों को एनर्जी स्टोरेज डिवाइस के तौर पर यूज किया जाता है।

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Image Source : UNSPLASHवी-टू-एक्स टेक्नोलॉजी

EV में स्टोर की गई इलेक्ट्रिसिटी को वापस ग्रिड में पहुंचाने के लिए V2I टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जाती है। ठीक इसी तरह ऑटोनोमस गाड़ियों में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। V2X टेक्नोलॉजी की वजह से ही गूगल की कंपनी Waymo अमेरिका में सेल्फ ड्राइविंग कार को ऑपरेट कर पाती है।

क्या होंगे फायदे?

  • इस टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रैफिक जाम की पहले से सूचना मिल जाएगी।
  • साथ ही, सड़क बंद होने की सूचना भी पहले ही ड्राइवर को मिलेगी।
  • यही नहीं, यह संभावित सड़क दुर्घटना से बचाव करने का काम करेगी।
  • अगर, आगे वाली गाड़ी अचानक से ब्रेक लगाएगी तो पीछे वाली गाड़ी को अलर्ट मिल जाएगा।
  • यह टेक्नोलॉजी खास तौर पर सर्दियों के मौसम में कोहरे में आगे चलने वाली गाड़ियों की सूचना देगी।
  • इसके अलावा इसकी मदद से एम्बुलेंस के लिए रास्ता खाली करने का अलर्ट भी मिलेगा।

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