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इन गलतियों से होती है पेट फूलने, कब्ज और आंतों की समस्या

Written By: Bharti Singh
Published : Aug 17, 2026 08:46 am IST,  Updated : Aug 17, 2026 08:46 am IST
फाइबर वाले भोजन के साथ अगर आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते हैं तो इससे पेट फूटने की समस्या हो सकती है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी बताते हैं कि फाइबर आंतों से गुजरते समय पानी सोख लेता है। अगर शरीर में भरपूर पानी नहीं है तो ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में आपको पेट फूलने और कब्ज की समस्या हो सकती है।
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फाइबर वाले भोजन के साथ अगर आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते हैं तो इससे पेट फूटने की समस्या हो सकती है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी बताते हैं कि फाइबर आंतों से गुजरते समय पानी सोख लेता है। अगर शरीर में भरपूर पानी नहीं है तो ये आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में आपको पेट फूलने और कब्ज की समस्या हो सकती है।
रातोंरात कम फाइबर वाले लोग अगर तेजी से डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाते हैं तो नुकसान हो सकता है। आपके पेट के बैक्टीरिया को इस बदलाव के अनुकूल होने के लिए समय चाहिए होता है। इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं। आप हर रोज करीब 5 ग्राम से ज्यादा फाइबर की मात्रा न बढ़ाएं और इसे धीरे-धीरे 15 ग्राम से 35 ग्राम तक पहुंचएं।
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रातोंरात कम फाइबर वाले लोग अगर तेजी से डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाते हैं तो नुकसान हो सकता है। आपके पेट के बैक्टीरिया को इस बदलाव के अनुकूल होने के लिए समय चाहिए होता है। इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं। आप हर रोज करीब 5 ग्राम से ज्यादा फाइबर की मात्रा न बढ़ाएं और इसे धीरे-धीरे 15 ग्राम से 35 ग्राम तक पहुंचएं।
आपको फाइबर की मात्रा को दिनभर में बांटना चाहिए। एक बार में बहुत ज्यादा फाइबर का सेवन करने से नुकसान हो सकता है। यानि आपकी आंत को एक बार में बड़ी मात्रा में फाइबर देने के बजाय, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन दिया जाए। क्योंकि एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने से पाचन तंत्र के पर बोझ पड़ सकता है।
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आपको फाइबर की मात्रा को दिनभर में बांटना चाहिए। एक बार में बहुत ज्यादा फाइबर का सेवन करने से नुकसान हो सकता है। यानि आपकी आंत को एक बार में बड़ी मात्रा में फाइबर देने के बजाय, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन दिया जाए। क्योंकि एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने से पाचन तंत्र के पर बोझ पड़ सकता है।
फाइबर दो तरह के होते हैं एक घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, ऐसे में जरूरी नहीं है कि सभी फाइबर एक तरह से ही काम करें। जई और साइलियम जैसे पदार्थों में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। ये दस्त और कोलेस्ट्रॉल मैनेज करने के लिए अच्छा माना जाता है। गेहूं के चोकर और सब्जियों के छिलकों जैसी चीजों में पाया जाने वाला अघुलनशील फाइबर, पेट भरने में मदद करता है और कब्ज के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है।
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फाइबर दो तरह के होते हैं एक घुलनशील और अघुलनशील फाइबर, ऐसे में जरूरी नहीं है कि सभी फाइबर एक तरह से ही काम करें। जई और साइलियम जैसे पदार्थों में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। ये दस्त और कोलेस्ट्रॉल मैनेज करने के लिए अच्छा माना जाता है। गेहूं के चोकर और सब्जियों के छिलकों जैसी चीजों में पाया जाने वाला अघुलनशील फाइबर, पेट भरने में मदद करता है और कब्ज के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है।
अगर फाइबर की मात्रा में बदलाव करने के बाद आपके पाचन संबंधी लक्षण बिगड़ रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको वही दिनचर्या जारी रखनी चाहिए। अपने लक्षणों को देखें और समझें। जरूरी नहीं है कि सभी के लिए इतनी मात्रा में ही फाइबर जरूरी हो। इसलिए एक साथ नहीं धीरे-धीरे थोड़े फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। इससे आपका पेट परिवर्तन के लिए सेट हो जाएगा।
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अगर फाइबर की मात्रा में बदलाव करने के बाद आपके पाचन संबंधी लक्षण बिगड़ रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको वही दिनचर्या जारी रखनी चाहिए। अपने लक्षणों को देखें और समझें। जरूरी नहीं है कि सभी के लिए इतनी मात्रा में ही फाइबर जरूरी हो। इसलिए एक साथ नहीं धीरे-धीरे थोड़े फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। इससे आपका पेट परिवर्तन के लिए सेट हो जाएगा।
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