Monday, March 16, 2026
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मात्र 72 दिनों के लिए मुगल सम्राट बना था यह शहजादा, मराठों की वजह से बेहद दर्दनाक हुआ था अंत

Vineet Kumar Singh Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Jan 22, 2026 08:40 am IST, Updated : Jan 22, 2026 08:40 am IST
  • मुगल साम्राज्य के इतिहास में एक बादशाह ऐसा भी हुआ है जो मात्र 72 दिनों के लिए ही गद्दी पर बैठ पाया था, और उसका नाम था जहां शाह। 18वीं सदी के अंत में, जब मुगल साम्राज्य अपनी अंतिम सांसें ले रहा था, बिदर बख्त महमूद शाह बहादुर उर्फ जहां शाह ने बतौर मुगल बादशाह 72 दिनों के लिए शासन किया था। यह दौर साम्राज्य के पतन, राजनीतिक अस्थिरता और बाहरी आक्रमणों का था। जहां शाह न केवल मुगल इतिहास के सबसे कम समय तक शासन करने वाले सम्राटों में से एक था, बल्कि उनकी कहानी यह भी बताती है कि उस वक्त मुगल साम्राज्य कितना बेबस और लाचार हो गया था।
    Image Source : Public Domain
    मुगल साम्राज्य के इतिहास में एक बादशाह ऐसा भी हुआ है जो मात्र 72 दिनों के लिए ही गद्दी पर बैठ पाया था, और उसका नाम था जहां शाह। 18वीं सदी के अंत में, जब मुगल साम्राज्य अपनी अंतिम सांसें ले रहा था, बिदर बख्त महमूद शाह बहादुर उर्फ जहां शाह ने बतौर मुगल बादशाह 72 दिनों के लिए शासन किया था। यह दौर साम्राज्य के पतन, राजनीतिक अस्थिरता और बाहरी आक्रमणों का था। जहां शाह न केवल मुगल इतिहास के सबसे कम समय तक शासन करने वाले सम्राटों में से एक था, बल्कि उनकी कहानी यह भी बताती है कि उस वक्त मुगल साम्राज्य कितना बेबस और लाचार हो गया था।
  • बिदर बख्त महमूद शाह बहादुर का जन्म लगभग 1749 में दिल्ली में हुआ था। वह पूर्व मुगल सम्राट अहमद शाह बहादुर का सबसे बड़ा बेटा था। उस समय तक मुगल साम्राज्य काफी कमजोर हो चुका था। 1739 में नादिर शाह के हमले के बाद दिल्ली पूरी तरह बर्बाद हो गई थी और हजारों लोग मारे गए थे। इसके बाद अहमद शाह दुर्रानी के हमलों ने साम्राज्य को और कमजोर किया। 1753 में बिदर बख्त को उसके पिता ने पंजाब का गवर्नर बनाया गया, लेकिन वह दरबार में ही रहे। 1754 में उसके पिता को सत्ता से बाहर कर दिया गया और उसकी आंखें फोड़कर पूरे परिवार को सलीमगढ़ किले में कैद कर लिया गया। यहां से बिदर बख्त का जीवन कैद और गरीबी में बीता।
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    बिदर बख्त महमूद शाह बहादुर का जन्म लगभग 1749 में दिल्ली में हुआ था। वह पूर्व मुगल सम्राट अहमद शाह बहादुर का सबसे बड़ा बेटा था। उस समय तक मुगल साम्राज्य काफी कमजोर हो चुका था। 1739 में नादिर शाह के हमले के बाद दिल्ली पूरी तरह बर्बाद हो गई थी और हजारों लोग मारे गए थे। इसके बाद अहमद शाह दुर्रानी के हमलों ने साम्राज्य को और कमजोर किया। 1753 में बिदर बख्त को उसके पिता ने पंजाब का गवर्नर बनाया गया, लेकिन वह दरबार में ही रहे। 1754 में उसके पिता को सत्ता से बाहर कर दिया गया और उसकी आंखें फोड़कर पूरे परिवार को सलीमगढ़ किले में कैद कर लिया गया। यहां से बिदर बख्त का जीवन कैद और गरीबी में बीता।
  • पिता की सत्ता छिन जाने के बाद बिदर बख्त का पूरा परिवार पेंशन पर निर्भर था। 1788 के आसपास रोहिल्ला सरदार गुलाम कादिर ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया और तत्कालीन सम्राट शाह आलम द्वितीय को बुरी तरह बेइज्जत किया। दरअसल, एक जमाने में गुलाम कादिर मुगल बादशाह शाहल आलम के दरबार में ही था, लेकिन अपमान से आहत होकर उसने विद्रोह कर दिया था। शाह आलम को सत्ता से हटाकर पहले उसने इसकी आंखें फोड़ीं, और पूरे परिवार पर जमकर जुल्म ढाया। इसके बाद उसने बिदर बख्त को कैद से निकाला और 31 जुलाई 1788 को उसे मुगल सम्राट घोषित कर दिया।
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    पिता की सत्ता छिन जाने के बाद बिदर बख्त का पूरा परिवार पेंशन पर निर्भर था। 1788 के आसपास रोहिल्ला सरदार गुलाम कादिर ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया और तत्कालीन सम्राट शाह आलम द्वितीय को बुरी तरह बेइज्जत किया। दरअसल, एक जमाने में गुलाम कादिर मुगल बादशाह शाहल आलम के दरबार में ही था, लेकिन अपमान से आहत होकर उसने विद्रोह कर दिया था। शाह आलम को सत्ता से हटाकर पहले उसने इसकी आंखें फोड़ीं, और पूरे परिवार पर जमकर जुल्म ढाया। इसके बाद उसने बिदर बख्त को कैद से निकाला और 31 जुलाई 1788 को उसे मुगल सम्राट घोषित कर दिया।
  • गुलाम कादिर की कृपा से बिदर बख्त मुगल सम्राट बन गया और उसका शाही नाम 'नासिर-उद-दीन मुहम्मद जहां शाह' रखा गया। जहां शाह एक कठपुतली था, और असली सत्ता गुलाम कादिर के हाथों में थी। लाल किले को लूटा गया, खजाने से लाखों रुपये निकाले गए, और शाही परिवार पर जमकर अत्याचार हुए। उन्हें पानी तक मुश्किल से दिया जाता था, और मुगल महिलाओं के साथ तमाम गलत हरकतें की जाती थीं। गुलाम कादिर ने महिलाओं के पास से भी संपत्ति लूटी थी और उनकी जमकर बेअदबी की थी। मुगल बादशाह होने के बावजूद जहां शाह तक को गुलाम कादिर के अत्याचारों का सामना करना पड़ा।
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    गुलाम कादिर की कृपा से बिदर बख्त मुगल सम्राट बन गया और उसका शाही नाम 'नासिर-उद-दीन मुहम्मद जहां शाह' रखा गया। जहां शाह एक कठपुतली था, और असली सत्ता गुलाम कादिर के हाथों में थी। लाल किले को लूटा गया, खजाने से लाखों रुपये निकाले गए, और शाही परिवार पर जमकर अत्याचार हुए। उन्हें पानी तक मुश्किल से दिया जाता था, और मुगल महिलाओं के साथ तमाम गलत हरकतें की जाती थीं। गुलाम कादिर ने महिलाओं के पास से भी संपत्ति लूटी थी और उनकी जमकर बेअदबी की थी। मुगल बादशाह होने के बावजूद जहां शाह तक को गुलाम कादिर के अत्याचारों का सामना करना पड़ा।
  • जहां शाह 31 जुलाई 1788 से 11 अक्टूबर 1788 तक मात्र 72 दिनों के लिए ही बादशाह रह पाया था। मराठा सरदार महादजी शिंदे की सेनाओं ने दिल्ली पर धावा बोल दिया था जिसके बाद गुलाम कादिर 2 अक्टूबर को दिल्ली से भाग गया और जहां शाह को भी अपने साथ लेता गया। 18 दिसंबर को शिंदे ने मेरठ पर कब्जा किया, और जहां शाह को फिर से सलीमगढ़ में कैद कर दिया गया। 11 अक्टूबर 1788 को महादजी ने जहां शाह को बादशाह की गद्दी से हटा दिया और शाह आलम द्वितीय को दोबारा मुगल बादशाह बनाकर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली। 1790 के आसपास शाह आलम द्वितीय के आदेश पर जहां शाह को मौत की सजा दी गई, और 72 दिनों के मुगल बादशाह के जीवन का अंत हो गया।
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    जहां शाह 31 जुलाई 1788 से 11 अक्टूबर 1788 तक मात्र 72 दिनों के लिए ही बादशाह रह पाया था। मराठा सरदार महादजी शिंदे की सेनाओं ने दिल्ली पर धावा बोल दिया था जिसके बाद गुलाम कादिर 2 अक्टूबर को दिल्ली से भाग गया और जहां शाह को भी अपने साथ लेता गया। 18 दिसंबर को शिंदे ने मेरठ पर कब्जा किया, और जहां शाह को फिर से सलीमगढ़ में कैद कर दिया गया। 11 अक्टूबर 1788 को महादजी ने जहां शाह को बादशाह की गद्दी से हटा दिया और शाह आलम द्वितीय को दोबारा मुगल बादशाह बनाकर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली। 1790 के आसपास शाह आलम द्वितीय के आदेश पर जहां शाह को मौत की सजा दी गई, और 72 दिनों के मुगल बादशाह के जीवन का अंत हो गया।