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पाकिस्तान में भी हैं माता सती के शक्तिपीठ और 1000 साल से ज्यादा पुराने मंदिर, सुंदरता-भव्यता ऐसी कि नजर हटे नहीं!

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Dec 04, 2025 04:59 pm IST,  Updated : Dec 04, 2025 05:06 pm IST
पाकिस्तान, भारत का पड़ोसी देश होने के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति का अनोखा खजाना भी है। यहां कई ऐसे हिंदू मंदिर मौजूद हैं, जो बंटवारे से पहले हिंदू समुदाय की गहरी आस्था और परंपरा को दर्शाते हैं। आज भले ही इनकी संख्या सीमित हो गई हो, लेकिन जो मंदिर बचे हैं, वे बेहद भव्य, रहस्यमय और देखने लायक हैं। पर्यटक भी विशेष रूप से इन मंदिरों के दर्शन के लिए पाकिस्तान पहुंचते हैं।
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पाकिस्तान, भारत का पड़ोसी देश होने के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति का अनोखा खजाना भी है। यहां कई ऐसे हिंदू मंदिर मौजूद हैं, जो बंटवारे से पहले हिंदू समुदाय की गहरी आस्था और परंपरा को दर्शाते हैं। आज भले ही इनकी संख्या सीमित हो गई हो, लेकिन जो मंदिर बचे हैं, वे बेहद भव्य, रहस्यमय और देखने लायक हैं। पर्यटक भी विशेष रूप से इन मंदिरों के दर्शन के लिए पाकिस्तान पहुंचते हैं।
1. हिंगलाज माता मंदिर: बलूचिस्तान के हिंगोल नेशनल पार्क के बीचोंबीच स्थित यह मंदिर पाकिस्तान के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती का सिर इसी स्थान पर गिरा था। यह मंदिर गुफानुमा पहाड़ियों के बीच स्थित है, जहां शिव जी भीम लोचन भैरव रूप में विराजमान हैं। यहां प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मक का अनूठा संगम है।
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1. हिंगलाज माता मंदिर: बलूचिस्तान के हिंगोल नेशनल पार्क के बीचोंबीच स्थित यह मंदिर पाकिस्तान के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती का सिर इसी स्थान पर गिरा था। यह मंदिर गुफानुमा पहाड़ियों के बीच स्थित है, जहां शिव जी भीम लोचन भैरव रूप में विराजमान हैं। यहां प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मक का अनूठा संगम है।
2. राम मंदिर: सैयदपुर गांव में स्थित प्राचीन राम मंदिर पाकिस्तान के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण 1580 में राजा मानसिंह ने कराया था। ऐतिहासिक स्थापत्य शैली में बना यह मंदिर इस्लामाबाद के पास होने के कारण पर्यटकों के बीच विशेष रूप से प्रसिद्ध है। बंटवारे के बाद भी इसकी संरचना ने समय के साथ अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए रखी है।
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2. राम मंदिर: सैयदपुर गांव में स्थित प्राचीन राम मंदिर पाकिस्तान के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण 1580 में राजा मानसिंह ने कराया था। ऐतिहासिक स्थापत्य शैली में बना यह मंदिर इस्लामाबाद के पास होने के कारण पर्यटकों के बीच विशेष रूप से प्रसिद्ध है। बंटवारे के बाद भी इसकी संरचना ने समय के साथ अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए रखी है।
3. पंचमुखी हनुमान मंदिर: कराची स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर लगभग 1500 साल पुराना माना जाता है। इसकी सबसे खास बात है हनुमान जी की पांच मुख वाली दुर्लभ और प्राकृतिक मूर्ति, जिसे कहीं और नहीं पाया जाता। यहां रोजाना भक्त हनुमान जी के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की संरचना पुरानी जरूर है, लेकिन इसकी महत्ता आज भी अटूट है।
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3. पंचमुखी हनुमान मंदिर: कराची स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर लगभग 1500 साल पुराना माना जाता है। इसकी सबसे खास बात है हनुमान जी की पांच मुख वाली दुर्लभ और प्राकृतिक मूर्ति, जिसे कहीं और नहीं पाया जाता। यहां रोजाना भक्त हनुमान जी के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की संरचना पुरानी जरूर है, लेकिन इसकी महत्ता आज भी अटूट है।
4. कटासराज शिव मंदिर: पंजाब के कटासराज गांव में स्थित कटासराज मंदिर परिसर अपने पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान शिव ने माता सती की मृत्यु के बाद शोक में अपने आंसुओं से यहां सरोवर बनाया था। यह मंदिर 900 साल पुराना है और आज भी हिंदू समुदाय के लिए तीर्थस्थल माना जाता है।
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4. कटासराज शिव मंदिर: पंजाब के कटासराज गांव में स्थित कटासराज मंदिर परिसर अपने पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान शिव ने माता सती की मृत्यु के बाद शोक में अपने आंसुओं से यहां सरोवर बनाया था। यह मंदिर 900 साल पुराना है और आज भी हिंदू समुदाय के लिए तीर्थस्थल माना जाता है।
5. गोरखनाथ मंदिर: 1947 के बाद दशकों तक बंद रहने वाला पेशावर का गोरखनाथ मंदिर साल2011 में एक बार फिर से खोला गया। यह मंदिर नाथ संप्रदाय से जुड़ा हुआ है और यहां रोजाना श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण यह मंदिर पेशावर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है।
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5. गोरखनाथ मंदिर: 1947 के बाद दशकों तक बंद रहने वाला पेशावर का गोरखनाथ मंदिर साल2011 में एक बार फिर से खोला गया। यह मंदिर नाथ संप्रदाय से जुड़ा हुआ है और यहां रोजाना श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण यह मंदिर पेशावर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है।
6. वरुण देव मंदिर: कराची स्थित वरुण देव मंदिर समुद्र देवता वरुण को समर्पित है। यह लगभग 1000 वर्ष पुराना मंदिर हिंदू संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद इसे 2007 में फिर से खोला गया और आज भी यह समुद्र किनारे अपनी सुंदरता और ऐतिहासिक शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है।
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6. वरुण देव मंदिर: कराची स्थित वरुण देव मंदिर समुद्र देवता वरुण को समर्पित है। यह लगभग 1000 वर्ष पुराना मंदिर हिंदू संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद इसे 2007 में फिर से खोला गया और आज भी यह समुद्र किनारे अपनी सुंदरता और ऐतिहासिक शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है।
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