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कैसे पता करें कि पिछले जन्म में आप क्या थे? ज्योतिष शास्त्र की मदद से जानें

Written By: Naveen Khantwal
Published : Dec 05, 2025 06:31 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 06:31 pm IST
जन्म और मृत्यु के रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिश हम सदियों से करते आ रहे हैं। अलग-अलग धर्मों के साथ ही विज्ञान में भी जन्म-मरण के रहस्य को जानने की कोशिश की गई है। हालांकि, ज्योतिष एकमात्र ऐसा ज्ञान का भंडार है जहां पुनर्जन्म या पूर्वजन्म के बारे में जानने का तरीका बताया गया है। ज्योतिष के कुछ सूत्रों से हम जान सकते हैं कि पिछले जन्म में हम क्या रहे होंगे।
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जन्म और मृत्यु के रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिश हम सदियों से करते आ रहे हैं। अलग-अलग धर्मों के साथ ही विज्ञान में भी जन्म-मरण के रहस्य को जानने की कोशिश की गई है। हालांकि, ज्योतिष एकमात्र ऐसा ज्ञान का भंडार है जहां पुनर्जन्म या पूर्वजन्म के बारे में जानने का तरीका बताया गया है। ज्योतिष के कुछ सूत्रों से हम जान सकते हैं कि पिछले जन्म में हम क्या रहे होंगे।
कुंडली का प्रथम भाव- कुंडली के प्रथम भाव में अलग-अलग ग्रहों की स्थिति आपके पूर्व जन्म के बारे में जानकारी देती है। अगर कुंडली के पहले भाव में सूर्य उच्च स्थिति में या मित्र राशि में हो तो पिछले जन्म में राजा की तरह जीवन व्यक्ति ने जिया होगा। वहीं नीच या प्रतिकूल सूर्य अनादर और अहंकार से भरे जीवन का संकेत देता है। अगर कुंडली में शनि या राहु स्थित हों तो पिछले जन्म में व्यक्ति गलत कार्य करने वाला हो सकता है या फिर किसी नीच योनि में उसका जन्म हुआ होगा। वहीं गुरु का लग्न में होना बताता है कि व्यक्ति धर्मनिष्ठ और सदाचारी रहा होगा। चंद्रमा और बुध का लग्न में होना भी बताता है कि पिछला जन्म सद्गुणों से युक्त होगा। वहीं मंगल का लग्न में होना व्यक्ति का पिछले जन्म में पराक्रमी होने का संकेत है।
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कुंडली का प्रथम भाव- कुंडली के प्रथम भाव में अलग-अलग ग्रहों की स्थिति आपके पूर्व जन्म के बारे में जानकारी देती है। अगर कुंडली के पहले भाव में सूर्य उच्च स्थिति में या मित्र राशि में हो तो पिछले जन्म में राजा की तरह जीवन व्यक्ति ने जिया होगा। वहीं नीच या प्रतिकूल सूर्य अनादर और अहंकार से भरे जीवन का संकेत देता है। अगर कुंडली में शनि या राहु स्थित हों तो पिछले जन्म में व्यक्ति गलत कार्य करने वाला हो सकता है या फिर किसी नीच योनि में उसका जन्म हुआ होगा। वहीं गुरु का लग्न में होना बताता है कि व्यक्ति धर्मनिष्ठ और सदाचारी रहा होगा। चंद्रमा और बुध का लग्न में होना भी बताता है कि पिछला जन्म सद्गुणों से युक्त होगा। वहीं मंगल का लग्न में होना व्यक्ति का पिछले जन्म में पराक्रमी होने का संकेत है।
ग्रहों की स्थिति से पिछले जन्म की जानकारी- अगर कुंडली में सूर्य त्रिक भावों यानि 6, 8 या 12 में हो तो पिछले जन्म में व्यक्ति गलत संगति रखता होगा या गलत कार्य करने वाला रहा होगा। शनि अगर एकादश, सप्तम या चतुर्थ भाव में है तो कोई पाप व्यक्ति से पिछले जन्म में हुआ है। अगर कुंडली में 4 या 4 से अधिक ग्रह नीच के हों तो व्यक्ति का जन्म किसी नीच योनि में हुआ हो सकता है या फिर व्यक्ति ने आत्महत्या की हो सकती है। वहीं 4 या 4 से अधिक ग्रह उच्च के हों तो व्यक्ति ने बेहद शानदार जीवन पूर्व जन्म में जिया होगा।
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ग्रहों की स्थिति से पिछले जन्म की जानकारी- अगर कुंडली में सूर्य त्रिक भावों यानि 6, 8 या 12 में हो तो पिछले जन्म में व्यक्ति गलत संगति रखता होगा या गलत कार्य करने वाला रहा होगा। शनि अगर एकादश, सप्तम या चतुर्थ भाव में है तो कोई पाप व्यक्ति से पिछले जन्म में हुआ है। अगर कुंडली में 4 या 4 से अधिक ग्रह नीच के हों तो व्यक्ति का जन्म किसी नीच योनि में हुआ हो सकता है या फिर व्यक्ति ने आत्महत्या की हो सकती है। वहीं 4 या 4 से अधिक ग्रह उच्च के हों तो व्यक्ति ने बेहद शानदार जीवन पूर्व जन्म में जिया होगा।
पंचम भाव से पूर्व जन्म की जानकारी- पंचम भाव को पूर्व जन्म के बारे में जानने के लिए सबसे कारगर ज्योतिष में माना जाता है। कुंडली के पांचवें भाव को अगर हम लग्न बनाए और फिर उसके अनुसार कुंडली को देखें तो जान सकते हैं कि पिछला जन्म कैसा रहा होगा।
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पंचम भाव से पूर्व जन्म की जानकारी- पंचम भाव को पूर्व जन्म के बारे में जानने के लिए सबसे कारगर ज्योतिष में माना जाता है। कुंडली के पांचवें भाव को अगर हम लग्न बनाए और फिर उसके अनुसार कुंडली को देखें तो जान सकते हैं कि पिछला जन्म कैसा रहा होगा।
कुंडली का पंचम भाव अगर शुभ ग्रहों से प्रभावित है तो समझ जाइए आपका पिछला जन्म काफी अच्छा रहा है और आपने पिछले जन्म में शुभ कार्य किए हैं। पूर्व जन्मों का शुभ परिणाम आपको इस जन्म में भी देखने को मिलेगा। वहीं पंचम भाव अगर बूरे ग्रहों के प्रभाव में है, इस भाव पर बुरे ग्रहों की दृष्टि है तो पिछले जन्म में आपने पाप कर्म किए होंगे और इस जन्म में आपको सुधार करने की आवश्यकता होगी।
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कुंडली का पंचम भाव अगर शुभ ग्रहों से प्रभावित है तो समझ जाइए आपका पिछला जन्म काफी अच्छा रहा है और आपने पिछले जन्म में शुभ कार्य किए हैं। पूर्व जन्मों का शुभ परिणाम आपको इस जन्म में भी देखने को मिलेगा। वहीं पंचम भाव अगर बूरे ग्रहों के प्रभाव में है, इस भाव पर बुरे ग्रहों की दृष्टि है तो पिछले जन्म में आपने पाप कर्म किए होंगे और इस जन्म में आपको सुधार करने की आवश्यकता होगी।
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