दरवाजे पर न लगाएं देवी-देवताओं के ये उग्र स्वरूप, वास्तु में मानी जाती है अशुभ, बिगड़ सकता है घर का माहौल
दरवाजे पर न लगाएं देवी-देवताओं के ये उग्र स्वरूप, वास्तु में मानी जाती है अशुभ, बिगड़ सकता है घर का माहौल
वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि यहां देवी-देवताओं के उग्र स्वरूप की तस्वीर लगाने से घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
Published : Sep 24, 2026 02:35 pm IST, Updated : Sep 24, 2026 02:35 pm IST
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वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग मुख्य द्वार पर देवी-देवताओं की तस्वीर लगाते हैं। हालांकि, वास्तु मान्यताओं के अनुसार हर स्वरूप की तस्वीर यहां लगाना उचित नहीं माना जाता। खासतौर पर देवी-देवताओं के उग्र और रौद्र रूप से जुड़ी तस्वीरों को मुख्य द्वार पर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। चलिए जानते हैं किस तरह तस्वीरें घर के दरवाजे पर नहीं लगानी चाहिए।
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वास्तु के अनुसार घर का प्रवेश द्वार सकारात्मक ऊर्जा के आने का माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार साफ और व्यवस्थित रहने से घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है। इसी कारण यहां रखी या लगाई जाने वाली चीजों का भी विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है।
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भगवान शिव के कई स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार पर उनका रौद्र रूप लगाने से बचना चाहिए। खासतौर पर नटराज या क्रोधित अवस्था वाली तस्वीर को घर के प्रवेश द्वार के लिए उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव और कलह की स्थिति बन सकती है।
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मां काली को शक्ति और दुष्टों के संहार से जुड़ी देवी माना जाता है। उनका उग्र रूप आक्रामक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार पर मां काली के इसी उग्र स्वरूप की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इससे घर के वातावरण में अनावश्यक विवाद और तनाव बढ़ सकता है।
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शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार पर शनि देव की तस्वीर या मूर्ति लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि उनकी सीधी दृष्टि घर के सदस्यों पर पड़ने से जीवन में तनाव और बाधाएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से मुख्य प्रवेश द्वार पर उनका उग्र स्वरूप लगाने से बचने की बात कही जाती है।
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मुख्य द्वार पर धार्मिक तस्वीर लगाने से पहले उसके स्वरूप और स्थान का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार शांत और सौम्य स्वरूपों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।