कुंडली में कैसे बनता है पितृ दोष? जानिए इसके मुख्य कारण और लक्षण
कुंडली में कैसे बनता है पितृ दोष? जानिए इसके मुख्य कारण और लक्षण
पितृ दोष की वजह से काम में रुकावट, विवाह में देरी, पैसों की समस्या और परिवार या संतान से जुड़ी परेशानियां आती हैं। तो यहां जानिए कि पितृ दोष कुंडली में कैसे बनता है और इसके उपाय क्या है।
Published : Sep 29, 2026 09:13 pm IST, Updated : Sep 29, 2026 09:13 pm IST
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अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष रहता है तो उस व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक हानि के साथ ही करियर में भी असफलता झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं शादी संबंधी मामलों में भी देरी देखने को मिलती है। तो आइए जानते हैं कि कुंडली में पितृ दोष कैसे बनता है।
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वैदिक ज्योतिष में सूर्य को पिता, पूर्वजों और आत्मबल से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि जब कुंडली में सूर्य का राहु के साथ, या सूर्य का केतु के साथ कोई खास संबंध बनता है तो कुछ ज्योतिषीय परिस्थितियों में उसे पितृ दोष से जोड़कर देखा जाता है।
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इसके अलावा नवम भाव, नवमेश, सूर्य की शक्ति और बाकि ग्रहों की चाल-ढाल, ये सब एक साथ मिलकर प्रभाव दिखाते हैं। जन्म कुंडली में जब सूर्य, राहु, केतु, नवम भाव और उनसे जुड़े ग्रहयोगों कि स्थित देखने के बाद पता चलता है कुंडली में पितृ दोष है या नहीं।
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पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष का समय अति उत्तम माना गया है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा कुंडली के हिसाब से मंत्र, उपाय, पूजा विधि और अन्य ज्योतिषों उपाय करने से भी पितृ दोष दूर हो सकता है।