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शरद पूर्णिमा के दिन खीर क्यों बनायी जाती है? जानें 3 प्रमुख कारण

शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। आज हम आपको इस दिन खीर बनाने के पीछे छुपे 3 कारणों के बारे में बताएंगे।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Oct 24, 2026 02:47 pm IST,  Updated : Oct 24, 2026 02:47 pm IST
शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस दिन खीर बनाने से क्या फल मिलते हैं और खीर बनाने के पीछे कारण क्या हैं इसके बारे में हम आपको जानकारी देंगे।
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शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस दिन खीर बनाने से क्या फल मिलते हैं और खीर बनाने के पीछे कारण क्या हैं इसके बारे में हम आपको जानकारी देंगे।
पहला कारण- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने से और फिर इसका सेवन करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
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पहला कारण- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने से और फिर इसका सेवन करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
दूसरा कारण- माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से और खीर का भोग माता को लगाने से माता प्रसन्न होती है। माता लक्ष्मी को खीर का भोग अतिप्रिय है।
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दूसरा कारण- माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से और खीर का भोग माता को लगाने से माता प्रसन्न होती है। माता लक्ष्मी को खीर का भोग अतिप्रिय है।
तीसरा कारण- शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के पीछे न केवल धार्मिक बल्कि आयुर्वेदिक कारण भी हैं। आयुर्वेद के अनुसार दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने से एंटी-बैक्टीरियल गुण खीर में आ जाते हैं। इस खीर का सेवन करना पित्त को शांत कर सकता है और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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तीसरा कारण- शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के पीछे न केवल धार्मिक बल्कि आयुर्वेदिक कारण भी हैं। आयुर्वेद के अनुसार दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने से एंटी-बैक्टीरियल गुण खीर में आ जाते हैं। इस खीर का सेवन करना पित्त को शांत कर सकता है और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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