Published : Jan 04, 2026 12:31 pm IST, Updated : Jan 04, 2026 12:31 pm IST
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जब पूरी दुनिया 2026 के जश्न में डूबी है, तो वहीं दुनिया में इथियोपिया एक ऐसा देश है, जहां के लोग अभी 2018 में जी रहे हैं। अगर आप आज भारत से उड़ान भरकर इथियोपिया पहुंचें, तो सीधे 7 साल पीछे पहुंच जाएंगे। ऐसा क्यों, आइए जानते हैं-
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दरअसल, यह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो आज भी आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय अपना प्राचीन कैलेंडर मानता है, जिसके कारण यह बाकी दुनिया से लगभग 7 से 8 साल पीछे चलता है।
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इथियोपिया के लोग न केवल दुनिया से पीछे हैं, बल्कि उनके समय मापने का तरीका भी पूरी तरह अलग है। इथियोपिया 'ऑर्थोडॉक्स चर्च' के प्राचीन कैलेंडर को मानता है। चूंकि, पैगम्बर ईसा मसीह के जन्म की गणना को लेकर इथियोपियाई चर्च और कैथोलिक चर्च के बीच मतभेद था।
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कैथोलिक चर्च ने 500 ईस्वी में गणना बदली और ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया। वहीं इथियोपिया ने अपनी पुरानी गणना नहीं बदली। इथियोपियाई मानते हैं कि ईसा मसीह का जन्म ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख से 7 साल पहले हुआ था। इसी अंतर की वजह से वे आज भी हमसे पीछे चल रहे हैं।
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इथियोपियाई कैलेंडर, जिसे 'गीज' कैलेंडर कहा जाता है, की सबसे बड़ी खासियत इसके महीने हैं। यहां 12 महीने 30-30 दिन के होते हैं। अंत में 13वां महीना आता है, जिसे 'पागुमे' कहा जाता है। यह महीना केवल 5 दिन का होता है (लीप ईयर में 6 दिन)। इसे 'खोए हुए दिनों' को पूरा करने के लिए जोड़ा जाता है।
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जहां दुनिया 1 जनवरी को जश्न मनाती है, वहीं इथियोपिया में नया साल 11 या 12 सितंबर को मनाया जाता है। इसे स्थानीय भाषा में 'एनकुतातश' कहते हैं।
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यहां दिन की शुरुआत भी अलग होती है। इथियोपिया में दिन की गिनती सूर्योदय (सुबह 6 बजे) से शुरू होती है। जब हमारी घड़ी में सुबह के 6 बजते हैं, तो इथियोपियाई समय के अनुसार वह दिन का 00:00 होता है।
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इथियोपिया की आबादी की बात की जाए तो ताजा अनुमानों के अनुसार, यहां की कुल जनसंख्या लगभग 13.7 करोड़ है। यहां ईसाई धर्म के लोग 62-67% हैं, जबकि इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग लगभग 31-34% हैं।