1. Hindi News
  2. गुजरात
  3. 226 करोड़ रुपये का ‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क बेनकाब, चार्जशीट में ड्रग्स से आतंकी फंडिंग तक कई बड़े खुलासे

226 करोड़ रुपये का ‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क बेनकाब, चार्जशीट में ड्रग्स से आतंकी फंडिंग तक कई बड़े खुलासे

 Reported By: Nirnay Kapoor Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Aug 27, 2026 07:57 pm IST,  Updated : Aug 27, 2026 07:57 pm IST

गुजरात CCoE की जांच में ₹226 करोड़ से अधिक के कथित ‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क का खुलासा हुआ है। चार्जशीट में डार्क वेब, ड्रग्स तस्करी, हवाला, साइबर फ्रॉड और कथित आतंकी फंडिंग के कनेक्शन बताए गए हैं। मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि 184 बैंक खाते और 95 क्रिप्टो वॉलेट चिन्हित किए गए हैं।

Dirty Crypto Network India, Gujarat Crypto Scam, Dark Web Drug Trafficking- India TV Hindi
‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। Image Source : REPORTER INPUT

Highlights

  • ₹226 करोड़ के डर्टी क्रिप्टो नेटवर्क की चार्जशीट में ड्रग्स और आतंकी फंडिंग के कनेक्शन सामने आए।
  • 935 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े Binance और दूसरे क्रिप्टो वॉलेट्स जांच में मिले हैं।
  • 184 बैंक खाते और 95 क्रिप्टो वॉलेट फ्रीज, 10 आरोपी गिरफ्तार, विदेशी एजेंसियों से किया गया संपर्क।

गांधीनगर: गुजरात के गांधीनगर स्थित 'साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CCoE) की जांच में 226 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित अंतरराष्ट्रीय ‘डर्टी क्रिप्टो’ नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हाल ही में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें डार्क वेब, ड्रग्स तस्करी, हवाला और कथित आतंकी फंडिंग से जुड़े कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क में अवैध तरीके से कमाए गए पैसे को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए छिपाया और अलग-अलग रास्तों से विदेशों तक पहुंचाया जाता था। मामले में गुजरात, मुंबई और हरियाणा से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

ड्रग्स से लेकर कथित आतंकी फंडिंग तक कनेक्शन

चार्जशीट के मुताबिक, इस गिरोह के तार डार्क वेब, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और आतंकी संगठनों के लिए कथित फंडिंग से जुड़े मिले हैं। जांच में सामने आया है कि नेटवर्क के जरिए ब्रिटेन और दुबई से जुड़े ड्रग्स कारोबार से पैसा हासिल किया जाता था। इसके अलावा, जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क के संबंध हमास, यमन के हूती विद्रोहियों और ईरान के IRGC-QF जैसे संगठनों तक होने का दावा किया है।

मोनेरो और USDT से छिपाया जाता था पैसा

जांच एजेंसियों के मुताबिक, अपराध से कमाए गए पैसे को छिपाने के लिए मोनेरो (Monero) जैसी प्राइवेसी-केंद्रित क्रिप्टोकरेंसी और USDT का इस्तेमाल किया जाता था। मोनेरो जैसी क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन की पहचान करना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। आरोप है कि इसी तरह की डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल अवैध धन को छिपाने और उसके स्रोत को अस्पष्ट करने के लिए किया गया। इसके बाद USDT में बदले गए डिजिटल पैसे को कथित तौर पर हवाला नेटवर्क और पारंपरिक आंगड़िया सिस्टम के जरिए नकदी में बदला जाता था। फिर यह पैसा विदेशों में बैठे कथित आकाओं तक पहुंचाया जाता था।

Binance वॉलेट और P2P ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल

चार्जशीट के मुताबिक, काले धन की लेयरिंग यानी पैसे के असली स्रोत को छिपाने के लिए Binance वॉलेट्स का इस्तेमाल किया जाता था। डार्क वेब से आने वाले पैसे को अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के बीच घुमाया जाता था। इसके बाद पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन के जरिए क्रिप्टो को कैश में बदलने का आरोप है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद कथित तौर पर पैसों की असली पहचान और उसके स्रोत को छिपाना था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचने के लिए अंगड़िया फर्मों का सहारा लिया। इसके अलावा, आरोप है कि रिश्तेदारों के PAN और Aadhaar कार्ड का गलत इस्तेमाल कर फर्जी क्रिप्टो अकाउंट और वॉलेट बनाए गए। हाल में भावनगर से भी कुछ संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिन पर KYC प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी वॉलेट बनाने का आरोप है।

डार्क वेब पर USDT और Monero से ड्रग्स का कारोबार

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ARTEMISLAB.CC और ABACUS Market जैसे डार्क-वेब मार्केटप्लेस पर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अवैध नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री की जाती थी। इन लेन-देन में खास तौर पर USDT और Monero के इस्तेमाल की बात सामने आई है। यानी ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम में आने के बजाय क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया जाता था। इस मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, सिंडिकेट द्वारा इस्तेमाल किए गए Binance और दूसरे क्रिप्टो वॉलेट्स देशभर में दर्ज 935 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए हैं। इससे जांच का दायरा केवल ड्रग्स और कथित आतंकी फंडिंग तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आती है। एजेंसियां अब इन साइबर फ्रॉड मामलों और कथित क्रिप्टो नेटवर्क के बीच संबंधों की भी जांच कर रही हैं।

10 आरोपी गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा

इस मामले में गुजरात, मुंबई और हरियाणा से अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किसकी क्या भूमिका थी। भावनगर में पकड़े गए संदिग्धों से भी KYC के दुरुपयोग और फर्जी क्रिप्टो वॉलेट से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान देश और विदेश में इस नेटवर्क से जुड़े 184 संदिग्ध बैंक खातों और 95 क्रिप्टो वॉलेट्स की पहचान की गई है। इन खातों और वॉलेट्स को फ्रीज या ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई है। एजेंसियां इनके जरिए हुए लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क के पैसों के प्रवाह का पता लगाया जा सके।

US, इजराइल और UK की एजेंसियों से संपर्क

मामले की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को देखते हुए गुजरात CID क्राइम ने अमेरिका, इजराइल और ब्रिटेन की जांच एजेंसियों से संपर्क किया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लेकर जांचकर्ता कथित ड्रग तस्करी, डार्क वेब गतिविधियों, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और कथित आतंकी फंडिंग से जुड़े विदेशी कनेक्शन की जानकारी जुटा रहे हैं। फिलहाल चार्जशीट में सामने आए इन आरोपों की जांच आगे भी जारी है। एजेंसियों का फोकस नेटवर्क के बाकी सदस्यों, पैसों के अंतिम लाभार्थियों और विदेशों से जुड़े कथित कनेक्शन का पता लगाने पर है। बता दें कि भावनगर पुलिस ने भी कुछ महीने पहले साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था

ये भी पढ़ें: 10वीं पास फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, 15 साल से बिना मेडिकल डिग्री चला रहा था क्लीनिक, मरीजों का कर रहा था इलाज

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। गुजरात से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।