अहमदाबाद: गुजरात के गिर वन क्षेत्र में 5 शेरों की मौत की बात सामने आई है, जिनमें 2 शावकों की जान बेबेसिया वायरस के संक्रमण के कारण जाने का संदेह है, जबकि तीन अन्य शेर ने प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष की घटनाओं में दम तोड़ दिया। हालांकि राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने गिर के जंगलों में किसी बड़ी महामारी या बीमारी के प्रकोप की आशंका से इनकार किया।
वन मंत्री ने क्या बताया?
गिर के जंगल दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थान रह गए हैं। मोधवाडिया ने कहा, "कुछ खबरों में शेरों की मौत बेबेसिया वायरस के संक्रमण से होने का दावा किया गया है, लेकिन केवल दो शेरों की जान जाने के पीछे इस संक्रमण का होने का संदेह है। बाकी 3 शेरों की मौत आपसी लड़ाई या अन्य कारणों से हुई।"
क्या है बेबेसिया वायरस?
मंत्री ने बताया कि बेबेसिया वायरस किलनी (टिक) नामक कीड़े के जरिये फैलता है और इससे संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण उभर सकते हैं। वन विभाग के अधिकारी और पशु चिकित्सकों की टीम बेबेसिया वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
वन मंत्री के मुताबिक, अधिकारी संदिग्ध शेरों की पहचान कर रहे हैं, सैंपल एकत्र कर रहे हैं और उन्हें उचित उपचार प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि निवारक उपायों के तहत जानवरों के शरीर से किलनी हटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मोधवाडिया ने कहा, "वन विभाग पूरी तरह से तैयार है और यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है कि यह संक्रमण वन क्षेत्र के अन्य हिस्सों में न फैले। किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।"
2018 में 11 शेरों की हुई थी मौत
बता दें कि इससे पहले, 2018 में गुजरात में एक महीने के भीतर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोआ संक्रमण के कारण 11 शेरों की मौत हो गई थी। साल 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर होने की बात सामने आई थी।
यह भी पढ़ें-
जंगल सफारी के दौरान शेरनी ने पर्यटकों के सामने किया लाइव शिकार, Video आया सामने