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चंद्रपुर: गुंजेवाही के जंगल में बाघ ने तेंदूपत्ता तोड़ने गईं चार महिलाओं को मार डाला, गांव में दहशत का माहौल

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 22, 2026 11:57 pm IST,  Updated : May 23, 2026 12:00 am IST

ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संकलन आज भी हजारों परिवारों के लिए रोजगार का प्रमुख साधन है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों का रुख करते हैं लेकिन लगातार बढ़ते बाघ हमलों ने लोगों में भय पैदा कर दिया है।

मृतक महिलाओं की फाइल फोटो- India TV Hindi
मृतक महिलाओं की फाइल फोटो Image Source : REPORTER

चंद्रपुर: जिले के सिंदेवाही तहसील अंतर्गत आने वाले गुंजेवाही के पास जंगल में शुक्रवार सुबह बाघ के हमले में चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। मृतक महिलाएं गांव के पास जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई थीं। तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है जबकि ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल गई थी महिलाएं

जानकारी के अनुसार, गुंजेवाही गांव की सात महिलाएं रोज की तरह तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल गई थीं। इसी दौरान अचानक बाघ की दहाड़ सुनाई दी। खतरा भांपकर तीन महिलाएं किसी तरह जंगल से बाहर निकलने में सफल रहीं लेकिन चार महिलाएं बाघ का शिकार बन गईं। बता दें कि पिछले वर्ष चंद्रपुर जिले में बाघ के हमलों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है। जबकि वर्ष 2026 में अब तक 19 लोग बाघ का शिकार बन चुके हैं।

मृतक महिलाओं की हुई पहचान

मृतकों की पहचान कवड़ाबाई दादाजी मोहुर्ले (45), अनीताबाई दादाजी मोहुर्ले (40), सुनीता कौशिक मोहुर्ले (38) और संगीता संतोष चौधरी (50) के रूप में हुई है। सभी महिलाएं गुंजेवाही गांव, सिंदेवाही रेंज, ब्रह्मपुरी डिवीजन, चंद्रपुर जिले की निवासी थी।

गरीब परिवार की थी महिलाएं

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया इस समय पूरे गांव में शोक और भय का माहौल बना हुआ है। इस हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। मृतक सुनीता मोहुर्ले के पति की दो वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। वह मजदूरी कर अपनी दो छोटी बेटियों एक 10 वर्ष और दूसरी 7 वर्ष का पालन-पोषण कर रही थीं। अब मां की मौत के बाद दोनों बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

वहीं मृतक कवड़ाबाई और अनीताबाई दोनों सगी बहनें थीं और परिवार की मुख्य कमाने वाली सदस्य थीं। उनका भाई विकलांग है और काम करने में असमर्थ बताया जाता है। जबकि वृद्ध मां बीमार रहती हैं। ऐसे में इस परिवार पर भी गहरा आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। चौथी मृत महिला संगीता चौधरी के पति भी अपाहिज बताए जा रहे हैं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।

वन विभाग लोगों को कर रहा जागरुक

रेंज फ़ॉरेस्ट ऑफिसर अंजली सायंकार ने बताया कि वन विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मृतक महिलाओं को भी कई बार जंगल में जाने से मना किया गया था। वन विभाग के अनुसार तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल जाने वाले ग्रामीणों को सीटी वितरित की गई है ताकि खतरे की स्थिति में वे अन्य लोगों को सतर्क कर सकें। इसके अलावा सिर के पीछे लगाने के लिए मुखौटे भी दिए गए है। घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में 10 कैमरे लगाए हैं जिनमें 4 लाइव कैमरे शामिल हैं। साथ ही चार पिंजरे लगाए गए हैं और तीन टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। विभाग का दावा है कि बाघ को पकड़ने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट- मिलिंद दिंन्डेवार, चंद्रपुर

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