मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक कार्यक्रम के दौरान मंच से कहा कि मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं, पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही। उन्होंने कहा कि 70 साल का हो गया हूं, यूं ही सठिया गया हूं... किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है। उनकी इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। लेकिन राजनीति के जानकार अब इस बयान के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं।
छात्र राजनीति से पार्षद और मेयर का सफर
कैलाश विजयवर्गीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक बेहद कद्दावर और बड़े नेता हैं, जिनका राजनीतिक सफर बेहद शानदार रहा है। उनके नाम एक रिकॉर्ड है कि वे अपनी जिंदगी में आज तक कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं। उन्हें राजनीति का एक बड़ा 'रणनीतिकार' या चाणक्य माना जाता है, जो मुश्किल से मुश्किल चुनाव को भी अपनी सूझबूझ से पार्टी के पक्ष में मोड़ देते हैं। उन्होंने अपने इस सफर की शुरुआत साल 1975 में कॉलेज के दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर एक छात्र नेता के रूप में की थी। इसके बाद, साल 1983 में वे पहली बार इंदौर के पार्षद बने और साल 2000 में इंदौर के मेयर चुने गए, जहां उन्होंने शहर के विकास के लिए कई बड़े और तारीफ के काबिल काम किए।
विधानसभा में अजेय रिकॉर्ड और मध्य प्रदेश में मंत्री पद
मध्य प्रदेश की विधानसभा राजनीति में भी उनका अजेय रिकॉर्ड रहा है; वे साल 1990 में पहली बार इंदौर-4 सीट से विधायक बने, फिर लगातार तीन बार (1993, 1998, 2003) इंदौर-2 सीट से चुनाव जीते और जब पार्टी ने उन्हें कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली मुश्किल सीट 'महू' से उतारा, तो वहां से भी उन्होंने 2008 और 2013 में शानदार जीत दर्ज की। अपनी इसी लोकप्रियता और सांगठनिक क्षमता के कारण वे साल 2003 से 2015 तक मध्य प्रदेश सरकार में लगातार कैबिनेट मंत्री रहे और पीडब्ल्यूडी, उद्योग, आईटी व नगरीय प्रशासन जैसे भारी-भरकम विभागों को संभाला।
साल 2014 में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा, जहां बीजेपी ने उन्हें हरियाणा चुनाव का प्रभारी बनाया और उनके नेतृत्व में पार्टी ने पहली बार हरियाणा में 4 सीटों से सीधे 47 सीटों पर पहुंचकर अपने दम पर सरकार बनाई। इस बड़ी सफलता के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उनकी मेहनत के दम पर बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 18 सीटें जीतीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 3 से 77 सीटों तक पहुंचाया। साल 2023 में वे करीब 10 साल बाद फिर से मध्य प्रदेश की राजनीति में लौटे और इंदौर-1 सीट से भारी मतों से चुनाव जीता। वर्तमान में वे मोहन यादव सरकार में नगरीय विकास एवं आवास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री हैं।
(रिपोर्ट- भरत पाटिल)
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