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मॉनसून सत्र से पहले हंगाम, बागी TMC सांसदों को देख भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक से पहले किया वॉकआउट, फिर हुए शामिल

 Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 19, 2026 12:03 pm IST,  Updated : Jul 19, 2026 12:22 pm IST

सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाए जाने के विरोध में विपक्ष ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। ये बागी सांसद NCPI नाम के दल में शामिल हुए हैं।

मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा- India TV Hindi
मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा Image Source : ANI

संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले रविवार को दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हंगामा देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किए जाने के विरोध में कांग्रेस, सपा, द्रमुक और आप समेत पूरे विपक्ष ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, बाद में विपक्ष के नेता इसे 'सांकेतिक विरोध' बताते हुए बैठक में दोबारा शामिल हो गए।

क्या है पूरा विवाद?

विपक्ष के वॉकआउट की मुख्य वजह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को बैठक में बुलाना और उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता देना रहा। ये बागी सांसद NCPI नाम के दल में शामिल हुए हैं।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, JMM, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (UBT) समेत पूरे विपक्ष ने इस बैठक से वॉकआउट किया है। टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में TMC की संख्या 28 दिखाई गई है, जबकि इन 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है। इनके खिलाफ अयोग्यता की 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने इन्हें किस आधार पर आमंत्रित किया?"

विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा

बैठक से बाहर निकलकर विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर संविधान की अवहेलना और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए यह वॉकआउट किया है। अंतिम फैसला लिए बिना इस तरह का कदम उठाना पूरी तरह से असंवैधानिक है।"

शिवसेना UBT सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "बागी सांसदों को जो संबद्धता दी गई है, वह कानून की किस किताब में लिखी है? हमने इसके खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।"

AAP सांसद एनडी गुप्ता ने कहा, "हमारे मामले में भी राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों को 'हाईजैक' कर लिया गया है। इस पर हमारी याचिका लंबित होने के बावजूद उन्हें राज्यसभा में अलग सीटें आवंटित कर दी गईं। यह लोकतंत्र की सरेआम हत्या है।"

बागी गुट का पक्ष- 'हम विकास के लिए आए हैं'

दूसरी ओर, NCPI में शामिल हुईं TMC की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार भी इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचीं, जहां केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू और अर्जुन राम मेघवाल ने उनका स्वागत किया। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 20 बागी सांसदों को अलग सीट आवंटित किए जाने के फैसले पर उन्होंने कहा, "हम देश और अपने राज्य के विकास के लिए काम करना चाहते हैं। सभी 20 सदस्य चाहते हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्र का विकास सही तरीके से हो और वे किसी खतरे में न रहें, क्योंकि हम पहले खतरे में थे। हमने आवेदन किया है, हमें जवाब मिले हैं और हम वो सभी दस्तावेज जमा कर रहे हैं, जो मांगे गए हैं।"

सांकेतिक विरोध के बाद बैठक में लौटा विपक्ष

शुरुआती तीखे विरोध और वॉकआउट के बाद विपक्षी दलों के नेता वापस सर्वदलीय बैठक में शामिल हो गए। नेताओं का कहना था कि उनका वॉकआउट सरकार की मनमानी के खिलाफ एक 'सांकेतिक विरोध' था, लेकिन वे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए बैठक का हिस्सा बने रहेंगे।

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