गुजरात पुलिस ने अहमदाबाद में बड़े ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपी ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ई कॉमर्स वेबसाइट को ठग रहे थे। ये लोग ई-कॉमर्स साईट पर पेमेंट गेटवे के साथ छेड़खानी कर कम कीमत में सामान लेकर उसे बेच देते थे। इन लोगों ने इस दौरान 3.25 लाख रुपये का ड्रोन सिर्फ 3.25 रुपये में खरीद कर 1.25 लाख में बेच दिया था। आरोपियों ने ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए से दो साल में सात करोड़ रुपयों का सामान खरीदा था।
पुलिस को जानकारी मिली थी कि अहमदाबाद के रिलीफ रोड पर एक ऑफिस में रात को सट्टा लगाया जा रहा है। हालांकि, वहां रेड करने गई क्राइम ब्रांच की टीम ने ई-कॉमर्स वेबसाइट को करोड़ों का चूना लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। इस मामले में तीन साइबर क्रिमिनल्स को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे करते थे ठगी?
आरोपी आर्डर करने के बाद पेमेंट गेटवे की प्रोसेसिंग के वक्त छेड़खानी करते थे और लाखों की चीजें चंद रुपयों में खरीद लेते थे। इन ठगों ने ऐसे सात करोड़ रुपयों के पार्सल मंगवाए थे। इस गैंग ने ई-कॉमर्स साईट पर सवा तीन लाख का लेटेस्ट ड्रोन सिर्फ सवा तीन रुपयों में ले लिया था और पैकिंग और बिल के साथ इसे सवा लाख रुपयों में बेच भी दिया। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जब रेड की तो विजय वाघेला और नितेश उर्फ छोटू इ-कॉमर्स साईट पर से अलग अलग चीजें आर्डर कर रहे थे। यहां पर क्रिकेट मैच पर सट्टा भी लगाया जाता था। नितेश और विजय से पूछताछ में पता चला कि ये लोग अपने साथ आदिल की मदद से इ-कॉमर्स साईट को चूना लगाते थे। ई-कॉमर्स साईट पर आर्डर करने के बाद पेमेंट गेटवे से छेड़छाड़ कर ये सिर्फ छोटी सी राशि ही चुकाते थे।
डी बगिंग और बग हंटिंग का उपयोग
विजय वाघेला सर्च इंजन पर से डी बगिंग सोफ्वारे लेकर बग हंटिंग कर वेबसाइट को कोम्प्रोमाईज करवा कर प्रोडक्ट आर्डर करता था। वहीं, नितेश उर्फ छोटू विजय द्वारा की गई बग हंटिंग से लिए गए प्रोडक्ट को बेचकर पैसे ले लेता था और आदिल ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट पर प्राइज प्रिडिक्शन कर जुआ में पैसे कमाता था। इस गैंग में आदिल और विजय वाघेला साइबर एक्सपर्ट है। आदिल ने भी बीएससी आईटी किया है। ये लोग किसी भी ई-कॉमर्स साईट पर जाकर ड्रोन, सोने के गहने या इलेक्ट्रॉनिक चीजों की खरीदारी करते थे और जब ऑनलाइन पेमेंट करना होता था तब पूरा पेमेंट करते थे और पेमेंट प्रोसेस में जो पांच सेकंड का समय लगता है तब डीबगिंग सॉफ्टवेर की मदद से पेमेंट गेटवे में छेड़छाड़ करते थे, जिससे चीजों की प्राइज के पीछे लिखे डिजिट निकाल कर छोटी सी राशि ही चुकानी होती थी। अगर सामान एक लाख का है तो वो इसमें से पेमेंट के वक्त सभी जीरो निकाल कर सिर्फ एक ही रूपया चुकाते थे।
दो साल में 126 पार्सल मंगवाए
इन ठगों ने पिछले दो सालों में 126 पार्सल मंगवाए थे, जिसमें हर बार वो अलग और फर्जी एड्रेस ही देते थे। इन्होंने ठगी करने के लिए बोगस प्रूफ से मोबाइल नंबर ले लिया था और भाड़े से अकाउंट भी रखे थे। ये लोग ई-कॉमर्स साईट से महंगी चीजें मंगवाते, पेमेंट गेटवे के साथ छेड़छाड़ कर एक-दो रुपये चुकाते थे। जब प्रोडक्ट डिस्पैच होता था तब वो अहमदाबाद या आसपास के इलाके के बोगस एड्रेस लिखवाते और बोगस प्रूफ से लिया गया नंबर लिखवाते, जिससे जब डिलीवरी वाला कॉल करे तो वो रोड पर ही पार्सल ले लेते थे। दो साल में इन्होने ऐसे 126 पार्सल मंगवाए थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद भी 6 लाख के पार्सल आये थे जो पुलिस ने जब्त कर लिए। इस मामले में इन तीनों की गिरफ्तारी तो की ही गई है साथ ही बैंक के कर्मचारियों और दूसरे लोगों की मिली भगत की संभावना भी है, जिसकी जांच चल रही है।