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गुजरात: सुबह 4 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच भूकंप के 6 झटके, नई फॉल्ट लाइन सक्रिय होने की आशंका

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 15, 2026 10:48 pm IST,  Updated : May 15, 2026 10:49 pm IST

भूकंप के झटके गिर के जंगल में रिकॉर्ड किए गए। हालांकि, इनकी तीव्रता बेहद कम थी, लेकिन 9 घंटे के अंदर 6 बार भूकंप के झटके महसूस होने के चलते नई फॉल्ट लाइन सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है।

Earthquake- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : REPORTER INPUT

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में शुक्रवार को 6 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला झटका सुबह चार बजे के करीब दर्ज किया गया। इसके बाज दोपहर एक बजे तक कुल 6 झटके महसूस किए गए। तलालागीर पंथाक में 3.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। सुबह 4 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच 6 झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र तलाला गीर से 15 किलोमीटर दूर कमलेश्वर बांध के पास दर्ज किया गया।

भूकंप का उद्गम स्थल जमीन से 10 किमी की गहराई पर था। इसे उत्तर पश्चिम दिशा में गिर जंगल के बीच में रिकॉर्ड किया गया। भूकंप की तीव्रता बेहद कम थी। इससे किसी को भी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन 9 घंटे के अंदर 6 झटके महसूस होने से नई फॉल्ट लाइन सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है। माना जा रहा है कि भीषण गर्मी के बीच फॉल्ट लाइन सक्रिय हुई है।

जूनागढ़ क्षेत्र में महसूस हुए झटके

भूकंप के झटके सुबह करीब 4:13 बजे गिर सोमनाथ जिले में वेरावल से लगभग 26 किमी उत्तर-पूर्व जूनागढ़ क्षेत्र के पास महसूस किए गए। इसकी गहराई लगभग 10 किमी थी। हालांकि, कोई जान-माल की हानि या बड़ी क्षति की खबर नहीं है। कुछ लोगों ने झटके महसूस किए, लेकिन यह सामान्य हल्का भूकंप था।

भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्र है गिर सोमनाथ

गुजरात का गिर सोमनाथ जिला भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। इसलिए यहां पर हल्के झटके महसूस होना सामान्य बात है। हालांकि, संवेदनशील इलाका होने के कारण सभी को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

क्यों आते हैं भूकंप?

धरती के अंदर 7 प्लेट्स होती हैं। ये प्लेट्स हर वक्त घूमती रहती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी जगहें हैं, जहां पर ये प्लेट्स आपस में ज्यादा टकराती हैं। ऐसे जोन को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। बार-बार टकराने के कारण प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं। जिस कारण ज्यादा दबाव पड़ता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इसके बाद धरती की एनर्जी बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढने लगती है। ऊर्जा के अचानक रिलीज होने से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं, जो जमीन को हिला देती हैं। भूकंप के दौरान और बाद में चट्टान की प्लेटें या ब्लॉक हिलना शुरू कर देते हैं और वे तब तक हिलते रहते हैं जब तक वे फिर से अटक नहीं जाते। जमीन के नीचे वह स्थान जहां चट्टान सबसे पहले टूटती है, भूकंप का फोकस या हाइपोसेंटर कहलाता है। फोकस के ठीक ऊपर (जमीनी सतह पर) स्थान को भूकंप का केंद्र कहा जाता है।

(गिर सोमनाथ से मितेश परमार की रिपोर्ट)

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