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गुजरात: 482 खातों के जरिए हुआ 804 करोड़ रुपये का फ्रॉड, साइबर क्राइम टीम ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया

 Reported By: Nirnay Kapoor Edited By: Shakti Singh
 Published : Sep 26, 2025 07:05 am IST,  Updated : Sep 26, 2025 07:05 am IST

नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 1549 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों के आधार पर 22 एफआईआर दर्ज हुई थीं और अब पुलिस ने 10 आरोपियों को पकड़ा है।

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साइबर क्राइम (प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Source : CYBERCRIME.GOV

गुजरात पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने 804 करोड़ रुपये के अपराध का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामल में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोप अलग-अलग तरीके से ठगी करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने कुल 804 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी। धोखाधड़ी के लिए 482 बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया था।

आरोपियों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 1549 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों के आधार पर 22 एफआईआर दर्ज हुई थीं। गुजरात में 1930 पोर्टल पर 141 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अहमदाबाद (2) और मोरबी (1) में 3 मामले दर्ज किए गए। गुजरात में इन घोटालों में लगभग ₹17.75 करोड़ का नुकसान हुआ।

कैसे ठगी करते थे आरोपी?

आरोपी कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड में शामिल थे। वह डिजिटल अरेस्ट कर लोगों को अपना शिकार बनाते थे और पैसे लूटते थे। इसके साथ ही शेयर में निवेश करने के नाम पर लोगों से ठगी करते थे और यूपीआई के जरिए फ्रॉड भी करते थे। बैंक में पैसे जमा करने, लोन दिलाने और पार्ट टाइम नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से ठगी होती थी।

आरोपियों के पास क्या-क्या मिला?

पुलिस को आरोपियों के पास कई तरह का आपत्तिजनक सामान मिला है। इसमें 529 बैंक अकाउंट किट, 447 एटीएम कार्ड, 686 सिम कार्ड, 16 पीओएस मशीनें, 60 मोबाइल, दो लैपटॉप, 11 साउंड बॉक्स, 17 क्यूआरकोड और एक राउटर बरामद किया है।

दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ चेतावनी दी

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लालच देकर या भय दिखाकर निर्दोष नागरिकों को ठगने वाले साइबर अपराधियों के प्रति जनता को सतर्क रहने को कहा। रोहिणी में एक निजी फाइनेंस कंपनी में आयोजित धोखाधड़ी जागरुकता कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (रेलवे) केपीएस मल्होत्रा ​​ने कहा कि यदि लोग सतर्क रहें, तो ज्यादातर साइबर अपराधों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ जब लोग निवेश पर बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करते हैं, तो वे लालच का शिकार हो जाते हैं। जब वे नकली बैंक अधिकारी या पुलिसकर्मी पर भरोसा करते हैं, तो वे धोखा खा जाते हैं और जब ये धोखेबाज डराते हैं, तो लोग डर से संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं।’’

इंफॉरमेशन डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी

मल्होत्रा ​​ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर ‘‘गुड मॉर्निंग’’ जैसे संदेश वाली किसी तस्वीर का भी इस्तेमाल खाते की जानकारी हासिल करने में किया जा सकता है। विशेष प्रकोष्ठ के एसीपी एच एस रंधावा ने लोगों से कोविड-19 के दौरान अपनाई गई ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ की तरह ही ‘इंफॉरमेशन डिस्टेंसिंग’ का आग्रह किया है। उन्होंने कार्यस्थल, व्यक्तिगत और सोशल मीडिया अकाउंट के लिए अलग-अलग ईमेल का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने नागरिकों को मज़बूत पासवर्ड रखने, और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी है।

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