गांधीनगर: गुजरात के जंगलों में अब एशियाई शेरों की दहाड़ और तेज हो गई है। राज्य में एशियाई शेरों की अनुमानित संख्या बढ़कर 891 हो गई है, जो पांच साल पहले 674 थी। इस महीने कराई गई गणना के आधार पर बुधवार को अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि शेर अब केवल गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी उपस्थिति अब 11 जिलों तक फैल गई है। इनमें कई गैर-जंगल और तटीय इलाके भी शामिल हैं।
अब 11 जिलों में फैले एशियाई शेर
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, “गुजरात में एशियाई शेरों की अनुमानित संख्या बढ़कर 891 हो गई है।” वन विभाग ने बताया कि जनगणना के अनुसार, 891 शेरों में से 196 नर, 330 मादा, 140 उप-वयस्क और 225 शावक शामिल हैं। शेरों की संख्या बढ़ने के साथ ही सौराष्ट्र क्षेत्र में भी उनका विस्तार हुआ है। पहले ये शेर जूनागढ़ और अमरेली जिलों के गिर राष्ट्रीय उद्यान तक ही सीमित थे, लेकिन अब ये 11 जिलों में फैल गए हैं।
गिर से बाहर भी बसे शेर
- गिर राष्ट्रीय उद्यान और उससे जुड़े अभयारण्यों में 384 शेर पाए गए, जबकि 507 शेर इन क्षेत्रों के बाहर मिले हैं।
- गिर के बाहर शेरों को पनिया, मटियाला, गिरनार और बारदा जैसे संरक्षित क्षेत्रों में देखा गया।
- इसके अलावा कई शेर गैर-जंगल और तटीय इलाकों में भी मिले।
- बारदा अभयारण्य में भी 17 शेरों को देखा गया, जो पोरबंदर से करीब 15 किलोमीटर दूर है।
- भावनगर जिले में एक ही झुंड में सबसे ज्यादा 17 शेर पाए गए।
PM मोदी ने जताई खुशी
गुजरात में शेरों की संख्या बढ़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा है, ''बहुत उत्साहित करने वाली जानकारी! यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ के तहत किए जा रहे प्रयासों से गुजरात में शेरों को अनुकूल माहौल मिलने के साथ ही उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है।''
10 से 13 मई तक दो चरणों में की गई गणना
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 16वीं एशियाई शेर गणना 10 से 13 मई तक दो चरणों में की गई। इसमें 11 जिलों के 58 तालुकों के 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया। वन विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रारंभिक गणना 10 और 11 मई को, जबकि अंतिम गणना 12 और 13 मई को की गई। इसमें 3,000 से अधिक स्वयंसेवकों, क्षेत्रीय, अंचल एवं उप-अंचल अधिकारियों, गणनाकारों, सहायक गणनाकारों और निरीक्षकों ने हिस्सा लिया।। इस बार गणना 'डायरेक्ट बीट वेरिफिकेशन' नामक तकनीक से की गई, जिसे अधिक सटीक माना जाता है।
ऐसे हुई शेरों की गणना
राज्य वन विभाग द्वारा हर पांच साल में शेरों की गणना की जाती है। स्वयंसेवकों ने शेरों की निगरानी के समय, दिशा, लिंग, आयु, शरीर पर विशेष चिन्ह और जीपीएस लोकेशन जैसी जानकारियां दर्ज कीं। विज्ञप्ति के अनुसार, शेरों की गणना के लिए कैमरा ट्रैप, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और रेडियो कॉलर जैसे तकनीकी उपकरणों का भी उपयोग किया गया। जूनागढ़, गिर सोमनाथ, भावनगर, राजकोट, मोरबी, सुरेन्द्रनगर, देवभूमि द्वारका, जामनगर, अमरेली, पोरबंदर और बोटाद में एशियाई शेर पाए गए। (भाषा इनपुट्स के साथ)