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गुजरात में गोहत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा, जज ने वेदों का किया जिक्र

 Reported By: Nirnay Kapoor,  Written By: Amar Deep
 Published : Oct 27, 2026 01:40 pm IST,  Updated : Oct 27, 2026 01:40 pm IST

गुजरात की कलोल सत्र अदालत ने गोहत्या मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा तीनों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। तीनों के पास से 277 किलोग्राम बीफ जब्त किया गया था।

तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा।- India TV Hindi
तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा। Image Source : PEXELS/REPRESENTATIVE IMAGE

कलोल की सत्र अदालत ने गोहत्या के एक मामले में तीन लोगों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में 277 किलोग्राम गोमांस (बीफ) जब्त किया गया था। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.आर. राजपूत ने गो-संरक्षण के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्राचीन संस्कृत ग्रंथों का हवाला दिया। दोषियों - जुहापुरा के वसीम कुरैशी, बेहरामपुरा के महमद रफीक कुरैशी और फतेहवाड़ी के असफाक बहेलिम - को 'गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) अधिनियम' और 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम' के तहत दोषी पाया गया था।

277 किलोग्राम गोमांस किया गया था जब्त

अतिरिक्त लोक अभियोजक जिग्नेश जोशी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था। 22 अगस्त 2024 को, उन्होंने जामला गांव में लालाभाई सेनमा के घर पर छापा मारा और इन तीन दोषियों के पास से 277 किलोग्राम गोमांस जब्त किया, जिसकी कीमत 55,000 रुपये थी। पुलिस ने गोहत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और मांस को ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक वाहन भी बरामद किया। जांच से पता चला कि आरोपी इस गोमांस को गुलाम मोइन कुरैशी को बेचने की योजना बना रहे थे। मुकदमे के बाद, अदालत ने छह आरोपियों में से तीन को दोषी करार दिया गया था।

कोर्ट ने सजा सुनाते हुए वेदों का किया जिक्र

वहीं सजा का ऐलान करते हुए कोर्ट ने वेदों का हवाला देते हुए कहा, "गाय को ब्रह्मांड की माता माना जाता है। यह मानव जीवन और समाज के लिए उपयोगी है। गायों की रक्षा करना धर्म और करुणा से जुड़ा कार्य है। जहां कहीं भी गोहत्या होती है, वहां कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि सबूतों से आरोपी का अपराध साबित हो जाता है, तो उसे उचित सजा दी जानी चाहिए...।" अपने फैसले में, अदालत ने टिप्पणी की कि गायों के सांस्कृतिक महत्व को जानने के बावजूद, आरोपियों ने एक गाय की हत्या की और उसके मांस को बेचने का प्रयास किया। अदालत ने आगे कहा कि यदि निर्धारित सजा नहीं दी जाती है, तो इससे गायों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल तीन दोषियों को सजा सुना दी गई है।

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