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हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कांग्रेस दे सकती है बड़ी जिम्मेदारी, शैलजा गुट को मिल सकता है ये पद

 Reported By: Vijai Laxmi Edited By: Mangal Yadav
 Published : May 15, 2025 05:31 pm IST,  Updated : May 15, 2025 05:36 pm IST

हरियाणा में चुनाव के सात महीने बाद नेता प्रतिपद जल्द ही मिल सकता है। वहीं, 12 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को नए जिला अध्यक्ष मिलना लगभग तय हो गया है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा की फाइल फोटो- India TV Hindi
भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा की फाइल फोटो Image Source : PTI

नई दिल्लीः हरियाणा कांग्रेस में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। गुटबाजी खत्म करने के लिए पार्टी कुछ अहम फैसले ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राज्य में विधायक दल का नेता बना सकती है। यानी विधानसभा चुनाव के सात महीने बाद हरियाणा विधानसभा को नेता प्रतिपक्ष मिल सकता है। वहीं कुमारी शैलजा खेमे से किसी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। 

 हाई पावर कमेटी ने खरगे को सौंपी रिपोर्ट

प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी इस कदर हावी है कि हरियाणा में कांग्रेस बीजेपी की सरकार बनने के सात महीने बाद भी न तो अब तक अपना प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर पाई है और न ही विधायक दल का नेता चुन पाई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने राज्य में विधायक दल के नेता को चुनने के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाई है। जिसने कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे को राज्य के विधायक दल के नेता को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया जिला अध्यक्षों को चुनने की प्रक्रिया के साथ पूरी की जायेगी।

गुटबाजी को खत्म करना चाहती है कांग्रेस

दरअसल, पार्टी राज्य में जहां जाट और दलित राजनीति के समीकरणों को साधना चाहती है तो वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के खेमों में बंटी प्रदेश इकाई में भी आपसी तालमेल बिठाना चाहती है। 

12 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिलेंगे नए जिला अध्यक्ष

बता दें कि गुजरात के पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब कांग्रेस हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी केंद्रीय और प्रदेश ऑब्जर्वर नियुक्त कर जमीनी स्तर से फीड बैक के आधार पर राज्य में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। कांग्रेस के भीतर गुटबाजी का हरियाणा सबसे बड़ा उदाहरण है जहां साल 2013 से पार्टी खेमे बाजी के चलते प्रदेश इकाई का गठन पिछले 12 सालों में नहीं कर पाई है। इसी गुटबाजी से बचने के लिए पार्टी ने गुजरात में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जिसमें एक केंद्रीय और तीन प्रदेश ऑब्जर्वर मिलकर जमीनी फीडबैक के आधार पर जिला अध्यक्षों की नियुक्त के लिए फीड बैक केंद्रीय नेतृत्व को देंगे और फिर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की जाएगी।

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