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गुरुग्राम में तोड़फोड़ और सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक, बिल्डर कॉलोनियों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई रुकी

 Written By: Subhash Kumar
 Published : Oct 13, 2026 06:22 pm IST,  Updated : Oct 13, 2026 06:46 pm IST

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुग्राम में बिल्डर कॉलोनियों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई फिलहाल रुक गई है। अब तक DLF, सुशांत लोक और साउथ सिटी में करीब 160 मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है।

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सांकितिक फोटो। Image Source : PTI

गुरुग्राम में तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही गुरुग्राम में बिल्डर कॉलोनियों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई फिलहाल रुक गई है। गौरव कोहली बनाम हरियाणा सरकार मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी। बता दें कि गुरुग्राम में DLF, सुशांत लोक और साउथ सिटी में करीब 160 मकानों पर अब तक कार्रवाई हो चुकी है।

दो सप्ताह के लिए कार्रवाई पर रोक 

हरियाणा के गुरुग्राम में बिल्डर कॉलोनियों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दो सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। गौरव कोहली बनाम हरियाणा सरकार मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह निर्देश दिए। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से DLF, सुशांत लोक और साउथ सिटी में अब तक करीब 160 मकानों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फिलहाल इस कार्रवाई पर विराम लग गया है।

हाई कोर्ट के आदेश के चुनौती

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। ये मामला नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DTP) के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। कुछ मकान मालिकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और कहा था कि डीटीपी को कार्रवाई का अधिकार नहीं है। यह क्षेत्र नगर निगम दायरे में है। इसमें नगर निगम कार्रवाई कर सकता है। 

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट मामले में सुनवाई करते हुए साफ कर दिया था कि अगर कोई बिल्डर कॉलोनी के नगर निगम के क्षेत्र में शामिल हो जाती है तो बस इस कारण से नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का क्षेत्राधिकार खत्म नहीं हो जाता है। हाई कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 का हवाला दिया था। हाई कोर्ट ने साफ किया था कि ये अधिनियम हरियाणा के सभी शहरी इलाकों पर लागू होता है जिसमें नगर निगम के क्षेत्र में आने वाली जमीन भी शामिल है। (रिपोर्ट: गोहित कौशिक)

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